अंतरिक्ष में सब कुछ क्यों घूमता है ?

अंतरिक्ष में सब कुछ क्यों घूमता है?: जब हम इस पूरे ब्रह्माण्ड को देखते हैं तो हमे हर चीज़ अपने धुरी पर घूमती हुई नजर आती है। मतलब हमारी धरती अपने धुरी पर घूमती है, हमारा सूरज अपने धुरी पर घूमता है। और यहाँ तक की हमारी आकाशगंगा भी घूम रही है। हमारी धरती की घूमने की रफतार 463.88 मीटर प्रति सेकंड है। वही सूरज की घूर्णन गति 1.997 किलोमीटर प्रति सेकंड है।

लेकिन क्यों आखिर इन सभी कक्षाओं को दिन रात 24 घंटे अपने धुरी पर घूमते रहने को मजबूर कर रही है। आज के इस आर्टिकल में, हम आपको बताने वाले हैं कि अंतरिक्ष में सब कुछ क्यों घूमता है?

दो कारण

इसको समझने के लिए मैं, आपको सौरमंडल के सभी चीज़ों को घूमने की वजह बताता हूँ। बात है उस समय की जब हमारा सौरमंडल नहीं बना था। मतलब आज से करीब 4.5 करोड़ साल से भी पहले की। इस समय हमारे सौरमंडल की जगह पर इंटरस्टेलर डस्ट और गैसों के विशालकाय बादल हुआ करते थे। यह बादल भी अपनी धुरी पर थोड़ा बहुत घूम रहे थे।  इसका कारण यह था कि इन बदलो में स्थित धातु लगातार घूम रहे थे। और यह घुमाओ उनके द्वारा बनाई गयी गुरुत्वाकर्षण के कारण हो रहा था।

दूसरा कारण यह हो सकता है कि वह बादल भी आकाशगंगा के बीच एक तारे के चारो ओर घूम रहा था। इस दूसरे वाले कारण को समझने के लिए आपको थोड़ा इंतज़ार करना होगा और इस आर्टिकल को अंत तक देखना होगा।

इंटरस्टेलर डस्ट और गैसों के विशालकाय बादल

इंटरस्टेलर डस्ट और गैसों के विशालकाय बादल के घुमाओ को हम कोणीय गति वर्णन कर सकते हैं। इसमें हमे दो टर्म मिलते हैं कोणीय वेग और जड़ता का क्षण। आज से करीब करोड़ो साल पहले इन सभी विशालकाय गैसों के बादल के आस पास कोई सुपरनोवा विस्फोट या फिर किसी और बाहरी कारक के कारण एक शॉक वेव आई थी। और यहाँ का पूरा धातु आपस में जुड़ने लगा था।

अपने पूल गेम के बारे में जरूर सुना तो होगा ही। और शायद इसे खेला भी होगा। इसमें जब आप एक बॉल को हिट करते हो और वह दूसरी बाल से टकराती है तो यहाँ पर दो कंडीशन बनती है।

पहली कंडीशन में दूसरी नंबर वाली बॉल होल से दूसरी तरफ दौड़ लगती है। और वही दूसरी कंडीशन में दोनों ही बॉल घूर्णी गति करने लगती है। ऐसा तब होता है, जब पहली बॉल दूसरे बॉल से बीच से नहीं टकराती।

अगर हम उस शॉक वेव को पहली बाल और इंटरस्टेलर डस्ट को दूसरा बाल माने तो दूसरी वाली कंडीशन हुई थी। इसके कारण इंटरस्टेलर क्लाउड तेज़ी से घूमने लगा। यह घुमाओ वामा व्रत था। इस टकराओ के कारण इंटरस्टेलर क्लाउड छोटे छोटे टुकड़ों में विभाजित गए। और इसके कारण कुल कोणीय गति भी छोटे छोटे भागों में विभाजित हो गया।

सूरज का निर्माण

समय के साथ साथ इस घुमाओ ने गति पकड़ी और सारा धातु बीच में इक्कठा होने लगा। और इस तरह हमारे सूरज का निर्माण हुआ। सूरज के चारो ओर एक गोला सा बन गया। जहाँ पर इंटरस्टेलर डस्ट और गैसों का बचा खुचा धातु स्तिथ था। इस बचे हुए धातु से ही बाद में ग्रह और दूसरी चीज़ें बन गयी। अब जो उनकी कोणीय गति सभी चीज़ों में विभाजित हो चुका था। तो इन सभी चीज़ो के पास अपना अपना कोणीय गति है। और क्यूंकि इस कोणीय गति को प्रभाव करने के लिए कोई बाहरी बल है ही नहीं। इसीलिए सभी चीज़ें अपने कोणीय गति को सुरक्षित रखने के लिए घूमता जा रहा है।

कोणीय गति का वितरण कैसे हुआ?

कोणीय गति का वितरण कैसे हुआ ? इसके बारे में वैज्ञानिक को भी बहुत सारे संदेह है। जो आज भी अच्छे से किसी को नहीं पता है। हमारे सौरमंडल के लगभग सभी चीज़ें वामा व्रत घूमती है। शुक्र ग्रह और अरुण ग्रह का अलग घुमाओ। भूतपूर्व में हुए कोई टकराओ के कारण हुआ है। ऐसा वैज्ञानिक भी मानते हैं।

आज के सौरमंडल में हमें एक और चीज़ देखने को मिलती है और वो है इसका आकार। यह एक फ्लैट डिस्क की तरह है। जो इस बात का सबूत है की सौरमंडल का निर्माण इंटरस्टेलर क्लाउड के कारण हुआ है। यही चीज़ हमे आकाशगंगा में भी देखने को मिलती है। यह भी लगभग एक फ्लैट डिस्क की तरह ही है। मतलब यहाँ पर भी एक समय इंटरस्टेलर क्लाउड का घुमाओ हुआ होगा। इसका मतलब यहाँ पर भी एक कोणीय गति होगी। जो छोटे छोटे भागो में विभाजित हो गए होंगे। और सौरमंडल के बनने से पहले जो इंटरस्टेलर क्लाउड थे, वह भी कोणीय गति को सुरक्षित रखने के लिए घूम रहे थे।

पूरे ब्रह्माण्ड में हर एक चीज़ क्यों घूमता है?

हमारे सौरमंडल का इंटरस्टेलर क्लाउड पहले क्यों घूम रहा था? तो इस तरह हम कह सकते हैं कि इस पूरे ब्रह्माण्ड में हर एक चीज़ सिर्फ इसलिए घूम रहा है क्यूंकि वह अपने कोणीय गति को सुरक्षित रखना चाहता है। और अपने घुमाओ में होने वाले बदलाव को रोकता है।

ऐसा माना जाता है कि बिग बैंग के बाद जब यह इंटरस्टेलर क्लाउड पूरे ब्रह्माण्ड में विभाजित हुए थे। तब इनकी घनत्व एक जैसी नहीं थी। कुछ क्लाउड्स ज्यादा खतरनाक थे और कुछ बहुत ही सघन थे। इस अंतर के कारण सिस्टम बिगड़ा और आज सभी चीज़ घूम रहे हैं।

एक उदाहरण

अब आपको यह थ्योरी अच्छे से समझ में आ गयी होगी कि अंतरिक्ष में सब कुछ क्यों घूमता है। हम में से ज्यादातर लोगो में यह उलझन रहती है कि अगर हमारी धरती अपने धुरी पर घूम रही है और वो भी 463.88 मीटर प्रति सेकंड के रफतार से। तो हम यह घुमाओ महसूस क्यों नहीं कर सकते? वैसे यह हमारे आदर्श सिद्धान्त पर निर्भर करता है। मतलब कि हम घूमते हुए चीज़ को कहाँ पर खड़े हो कर देख सकते हैं। इसको हम एक कार के उदाहरण से आसानी से समझ सकते हैं।

आपके ये जरूर ध्यान दिया होगा कि जब हम कार के अंदर बैठ कर खिड़की से बाहर देखते हैं। तो हमे कार चलती हुई नहीं दिखती। बल्कि हमे ऐसा लगता है कि मानो आस पास की चीज़ें गति में हो। यहाँ पर हम भी कार के अंदर ही बैठे हुए होते हैं। लेकिन हमारी शरीर को कार की गति नहीं दिखती। बल्कि बाहर की गति का पता चलता है। जबकि बाहर की चीज़ें तो पूरी तरह से स्थिर होती है। वही अगर हम बहार खड़े हो कर कार को चलते हुए देखे, तो हमे कार गति में नजर आएगी।

यही सभी चीज़ें धरती पर भी लागू होती है। अब क्यूंकि हम धरती पर ही मौजूद है, तो हम इसे घूमते हुए नहीं देख सकते। यहाँ से हमे ऐसा लगता है कि मानो सूरज और रात में आसमान के सभी तारे हमारा चक्कर लगा रहे हैं। जबकि ऐसा नहीं है। अगर आप धरती के बाहर किसी जगह से इसको देखोगे, तो आपको इसकी घूर्णन गति आसानी से दिख जाएगी।

अब अगर हमारी कार अचानक से रुक जाये, तो ऐसे में हमे समझा आ जाता है कि आखिर में मूव कौन कर रहा था। ठीक इसी तरह हमारी धरती भी अचानक से रुक जाये तो हमे समझ आएगा कि धरती घूम रही थी या नहीं। लेकिन तब तक तो हम आसमान की सैर पर निकल चुके होंगे।


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