अगर बृहस्पति और शनि ग्रह आपस में टकरा गए तो क्या होगा?

अगर बृहस्पति और शनि ग्रह आपस में टकरा गए तो क्या होगा?

24 सितंबर 2008, लॉस एंजेलिस के यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के कुछ खगोलविदों ने पृथ्वी से करीब 300 प्रकाश वर्ष दूर मेष नक्षत्र में स्तिथ बीडी +20 डिग्री 307. सौरमंडल में एक बेहद ही अजीब घटना देखी थी। हुआ यूँ कि सौरमंडल के तारे को की परिक्रमा करने वाले दोनों एक्सोप्लैनेट किसी कारण वाश आपस में टकरा गए।

अगले दो तारे और दोनों ही आकाशगंगा और ब्लैक होल के टकराने के बार में तो अपने सुना ही होगा। लेकिन यह घटना काफी अनोखा था। किसी भी सौरमंडल में दो ग्रहों का आपस में टकराना, इसके हमारे पास ज्यादा उदहारण नहीं है।

सवाल यह उठता है कि क्या हमारे सौरमंडल में भी ऐसा कुछ हो सकता है। बृहस्पति और शनि ग्रह, हमारे सौरमंडल के दो सबसे बड़े ग्रह है। और जाहिर सी बात है, कि सौरमंडल में इनका गुरुत्वाकर्षण प्रभाव भी काफी ज्यादा है। अब आपके दिमाग में यह सवाल जरूर चल रहा होगा कि कभी कोई गुरुत्वाकर्षण का खेल हुआ। और बृहस्पति और शनि ग्रह आपस में टकरा गए, तब इसका अंजाम क्या होगा? क्या इससे यह दोनों ग्रह खत्म हो जायेंगे। और इस टक्कर का हम पर और हमारी धरती पर क्या प्रभाव पड़ेगा? और क्या यह टकराओ हमारे सौरमंडल के अंत का कारण बन सकता है? आपके दिमाग में चल रहे इन सभी सवालों का जवाब आज के इस आर्टिकल में हम आपको देने हैं।

बृहस्पति ग्रह का द्रव्यमान 

बृहस्पति ग्रह हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। जिसका द्रव्यमान हमारे सूरज के द्रव्यमान से केवल 1047 गुना ही कम है। और इसका कुल व्यास 1,39,820 किलोमीटर है। जो सूरज से करीब 10 गुना कम है। यह पूरे सौरमंडल के कुल द्रव्यमान का 0.1% जगह लेता है।

अगर हम सौरमंडल के सारे ग्रहो के द्रव्यमान को एक साथ मिला भी दें। तो भी बृहस्पति ग्रह के द्रव्यमान उनसे 2.5 गुना ज्यादा ही निकलेगा। ऐसा कहा जाता है कि अगर बृहस्पति ग्रह का द्रव्यमान थोड़ा और ज्यादा होता तो यह एक तारा भी बन सकता था। और फिर हमे भी एक बाइनरी सौर प्रणाली में रहने का सौभाग्य मिल सकता था।

वही अगर बात करें शनि ग्रह की तो बृहस्पति ग्रह के पास सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह शनि ग्रह ही तो है। इसका द्रव्यमान हमारे धरती के द्रव्यमान के मुकाबले 95 गुना ज्यादा है। जबकि इसका व्यास 1,16,460 किलोमीटर का है। जो कि हमारे सूरज के मुकाबले 12 गुना कम है। शनि ग्रह और बृहस्पति ग्रह, यह दोनों ही अपनी मजबूत गुरुत्वाकर्षण बल के लिए जाने जाते हैं।

गुरुत्वाकर्षण प्रभाव

और अपने मजबूत गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही यह सौरमंडल के बाहरी चीज़ों का अंदर आने से अपनी गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के अंदर रखते हैं। और अंदर के सौरमंडल की तरफ आने वाले चीज़ों को भी अक्सर अपनी तरफ खिंच लेते हैं।

लेकिन क्या हो अगर इन दोनों ग्रहों की गुरुत्वाकर्षण इन्ही दोनों से धोखा कर जाये तो? और यह दोनों ग्रह आपस में टकरा जाये? जैसा कि आप सभी जानते हैं कि बृहस्पति ग्रह और शनि ग्रह, दोनों ही बहुत बड़े ग्रह है। मतलब कि यह दोनों ही ग्रह हाइड्रोजन और हीलियम गैस से मिलकर बने है। इन दोनों ही ग्रहों के पास कोई चट्टानी सतह भी नहीं है।

जैसे ही यह दोनों ग्रह एक दूसरे के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के अंदर आएंगे और पास आने लगेंगे। तब इनकी खुद का परिवार इनसे जुदा हो जाएँगी। मेरा मतलब है, इनका चाँद, इनके ऑर्बिट से बाहर निकल जायेंगे।

बृहस्पति और शनि ग्रह का चाँद

आपको बता दूँ कि बृहस्पति ग्रह के पास चाँद है। और वही शनि ग्रह के पास 2 चाँद है, जिनके साथ वह सौरमंडल में चाँद का राजा है। तो आप आपको बताते हैं इनके टक्कर के बारे में। तो यहाँ पर गुरुत्वाकर्षण प्रभाव इतना तेज़ होता है, जिससे बृहस्पति और शनि ग्रह के सभी चन्द्रमा अंतरिक्ष में दूर दूर तक फेक दिए जायेंगे। हो सकता है कि इनमे से कुछ चाँद सौरमंडल के अंदर बसे दूसरे ग्रहों से टकरा जाये और उन्हें बर्बाद कर दे। ऐसे में उन्ही हमारी धरती से टकराने की संभावना करीब 0.5% तक हो सकती है।

और केवल यही नहीं, हो सकता है कि इनमे से कुछ चन्द्रमा सौरमंडल के सभी सीमाओं को पार करके सौरमंडल के बाहर पहुंच जाये। और एक चाँद बन कर वहीं पर हमेशा के लिए भटकते रहे।

जैसे ही यह दोनों ग्रह एक दूसरे से टकराएंगे। तो बृहस्पति ग्रह, जो कि एक बड़ा ग्रह है। वह शनि ग्रह, यानिकि उससे छोटे ग्रह को अपने अंदर निगल लेगा। और शनि ग्रह हमेशा के लिए बृहस्पति ग्रह का ही हिस्सा बना जाएगा। इस टकराओ के दौरान इतनी ज्यादा गर्मी निकलने वाली है, जिसका हम अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते। यह गर्मी विकिरण पूरे सौरमंडल को नुक्सान पहुचायेगी ही। और इससे हमारी धरती और इस पर रहने वाले सबसे बुद्धिमान या होशियार प्राणी भी कुछ नहीं कर पाएंगे।

परिस्तिथियाँ

अब जब यह दोनों ग्रह आपस में मिल जायेंगे, तो यहाँ पर दो परिस्तिथियाँ पैदा हो सकती है। जिसमे से पहली परिस्तिथि तो यह है कि दोनों ग्रह मिल कर सौरमंडल में एक नए ग्रह का निर्माण करेंगे। जो कि बृहस्पति ग्रह के आकर से बड़ा होगा और एक बहुत बड़ा गैस का गोला होगा। ऐसे परिस्तिथि में अगर सौरमंडल का कोई दूसरा ग्रह खत्म न हुआ तो अब हमारे सौरमंडल में कुल 7 ग्रह ही बचेंगे। और यहाँ पर दूसरी परिस्तिथि के बारे में बात करे तो हो सकता है कि यह दोनों ग्रह मिल कर एक ब्राउन बौना सितारा का निर्माण कर दे।

ब्राउन बौना सितारा, ऐसे सितारा होते हैं जिनका आकर बृहस्पति ग्रह से बस थोड़ा ही बड़ा होती है। और इनकी चमक सूर्य के मुकाबले 10 गुना से भी कम होती है। जब यह दोनों ही ग्रह एक दूसरे में मिल जायेंगे, तो इस नए ग्रह के कोर में परमाणु संलयन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। और हाइड्रोजन और हीलियम के प्रतिक्रिया से निकलने वाली अविश्वसनीय गर्मी के कारण ही यह एक सितारे का निर्माण कर सकता है।

सतह का तापमान

इसके निर्माण के समय इसके सतह का तापमान हमारे सूर्य के सतह के बराबर होगा। मतलब करीब 6000 डिग्री सेल्सियस होगा। जैसा कि मेने आपको बताया कि इसकी चमक सूरज के मुकाबले काफी कम होगी। लेकिन इससे कुछ भी हो हम इसे आसानी से सौरमंडल के किसी भी कोने से देख पाएंगे।

अब अगर यह दोनों ग्रह तारे बन गए तो हमारा सौरमंडल भी एक बाइनरी सौरमंडल बन जायेगा। बाइनरी सौरमंडल, एक ऐसा सौरमंडल होता है जिसमे तो तारे होते हैं। दोनों ही तारे एक दूसरे को एक सामान्य बैरियर के आसपास ऑर्बिट करते हैं।

लेकिन हम अपने सौरमंडल के हिसाब से बात करें तो शनि ग्रह और बृहस्पत ग्रह का संयुक्त द्रव्यमान, कुल ग्रह द्रव्यमान का 90% है। जो कि हमारे सूरज के द्रव्यमान के मुकाबले केवल 0.11% ही होगा।

मतलब मुझे तो नहीं लगता कि तारा बनने के बाद भी यह सूरज के वर्तमान पद को थोड़ा भी बदल पाएगा। अगर शनि और बृहस्पति ग्रह मिल कर एक ग्रह बनाते हैं। तो उनके निर्माण के बाद काफी ज्यादा मात्रा में बचने वाली गैस इसके चारो ओर जमा हो जाएगी। और समय के साथ साथ ठंडा हो क्र इस नए ग्रह के भविष्य चाँद का निर्माण करेगी।

अगर शनि और बृहसपति ग्रह टकरा गए तो 

अगर शनि और बृहसपति कल के दिन टकरा जाते हैं, तो इससे यह इससे खत्म तो नहीं होने वाले। लेकिन इसका हमारे सौरमंडल पर क्या प्रभाव पड़ता है। और क्या यह धरती को नुक्सान पंहुचा सकती है। जैसा कि मेने आपको पहले ही बताया था कि इनके टकराओ के बाद निकलने वाली गर्मी इतनी ज्यादा होगी कि यह हारती को तो नहीं लेकिन यहाँ रहने वाले जीवो को तो जरूर खत्म कर सकती है। इससे प्राकृतिक वनस्पतियां खत्म हो जाएगी। और यह विकिरण हमारे ओजोन परत को भी पार करके पृथ्वी को बर्बाद कर सकती है।

इन दोनों ही ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कारण जो चाँद आकर पृथ्वी से टकराने वाले थे। वो तो है ही, लेकिन साथ में यह मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच एस्ट्रोइड बेल्ट में बसे एस्ट्रोइड से टकरा कर। या फिर उन्हें अपने ऑर्बिट में फसा कर पृथ्वी की तरफ प्रॉजेक्ट कर सकते हैं।

गर्मी विकिरण या फिर चाँद आ कर टकरा जाये तो 

अब परिस्तिथियाँ चाहे किसी भी हो। चाहे गर्मी विकिरण आ जाये या फिर चाँद आ कर टकरा जाये। या फिर केवल एस्ट्रोइड को ही प्रोजेक्ट क्यों न कर दे। आखिर में पृथ्वी का जीवन भी तो खत्म होना है।

हमारा आखिर सवाल यह है कि इससे पूरे सोर प्रणाली पर क्या असर पड़ेगा? अब जब बृहस्पति और शनि ग्रह आपस में मिलेंगे और अपने आकार और द्रव्यमान से बड़ा कोई ग्रह का निर्माण करेंगे। तो जाहिर सी बात है कि इनकी गुरुत्वाकर्षण ज्यादा हो जाएगी। और यह सौरमंडल के बाहरी चीज़ों पर ज्यादा गुरुत्वाकर्षण आकर्षण लगाएंगे। इसके आस पास के ग्रह जैसे कि मंगल, अरुण और वरुण ग्रह की ऑर्बिट थोड़ी बदल जाएगी।

पूरे सौरमंडल में आपातकालीन स्तिथि हो जाएगी। अब इससे पहले कि आप कल्पनाओ में कुछ ज्यादा ही खो जाओ और यह सब सच समझने लगे। तो मैं आपको बताना चाहूंगा कि यह सिर्फ एक कल्पना ही है। और असल में ऐसा कुछ भी फ़िलहाल तो नहीं हो सकता है। बृहस्पति और शनि ग्रह, दोनों ही करोड़ो सालों से अपने ऑर्बिट में स्थिर बने हुए हैं। और अपने साथ साथ पूरे सौरमंडल को भी स्थिर बनाये हुए है। और आने वाले करोड़ो सालों में भी ऐसा कुछ नहीं होने वाला है। जिससे कि उनके ऑर्बिट पर कोई असर पड़े। लेकिन अगर अचानक से ऐसा कुछ हो गया तो यह अंतरिक्ष है, यहाँ सब कुछ संभव है।


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