अद्भुत खोज जिन्हे वैज्ञानिक अभी तक नहीं समझा सके

अद्भुत खोज जिन्हे वैज्ञानिक अभी तक नहीं समझा सके: आज हम जमीन के अंदर से मिलने वाले गजब की चीज़ों के बारे में बात करेंगे। जिनका अभी तक वैज्ञानिक के पास कोई भी जवाब मौजूद नहीं है। तो चलिए शुरू करते हैं।

10 हजार साल पुराने एक जानवर के शरीर का एक हिस्सा

अमेरिका के एक राज्य मिशिगन में रहने वाले एक किसान को जमीन से ऐसा क्या मिला था? जिसने दुनियाभर के वैज्ञानिकों के होश ही उड़ा दिए। यह किसान अपने सोयाबीन के खेतों में हल चला रहा था। तभी अचानक उसकी नजर एक अजीब सी चीज़ पर पड़ी।

अर्जेंटीना में रहने वाला एक जमींदार ऐसा सोच भी नहीं सकता था। कि उसकी जमीन से ऐसा भी कुछ निकल सकता है। यह जमींदार अपनी खेतों की सैर कर रहा था। अचानक उसकी नजर अजीबो गरीब चीज़ पर पड़ी। जो दिखने में डायनासोर के अंडे की तरह लग रहा था।

लेकिन सच्चाई इससे कई ज्यादा दिलचस्प थी। किसान ने जब यह अनोखी चीज़ देखी तो उससे रहा नहीं गया और उसने जमीन खोदना शुरू कर दिया। यह अनोखी चीज़ 3 फिट जमीन में धंसि हुई थी। जिसको काफी मेहनत करके निकला गया।

जब खोजकर्ताओं के पास यह खबर पहुंची तब पता चला कि यह कोई डायनासोर का अंडा नहीं। बल्कि 10 हजार साल पुराने एक जानवर के शरीर का एक हिस्सा था, जिसे शेल कहा जाता है। और यह जानवर अपनी सुरक्षा के लिए यह शेल इस्तेमाल करते हैं।

हैरान करने वाली बात तो यह है कि इतने साल गुजरने के बाद भी इसकी मजबूती में कोई खास फर्क नहीं आया था। यह वो जानवर है, जिसने धरती पर 10 हजार साल पहले पाए जाते थे। और इनको ग्लिप्टोडों कहा जाता था। इस शेल का जब वजन किया गया तो मालूम पड़ा कि यह 1100 किलो वजनी है। जिस जानवर के सिर्फ शेल का वजन सिर्फ 1100 किलो हो, वह पूरा जानवर कितना वजनी होगा? इसका अंदाजा आप खुद ही लगा लें।

मार्बल से बना एक ताबूत

1970 में कुछ खनिक साइबेरिया के एक खान में 70 मीटर की गहराई में मामूल क्र मुताबिक काम कर रहे थे। कि अचानक एक खनिक की नजर मार्बल से बने एक ताबूत पर पड़ी। जो जमीन के अंदर बुरी तरह से धसा हुआ था। उन्होंने बगैर समय बर्बाद किये उसको बाहर निकलने का काम शुरू कर दिया। क्यूंकि यह ताबूत इनकी सोच से भी ज्यादा वजनी था। इसीलिए उनको उस ताबूत को बाहर निकलने में काफी वक़्त लग चुका था। ताबूत बाहर आ चुका था और अब बारी थी उसको खोलने की।

जो खनिक ताबूत मिलने पर ही इतने हैरान थे। उनको इस बात का बिकुल भी अंदाजा नहीं था कि अगले ही लम्हे वह क्या देखने जा रहे हैं। जब ताबूत खोला गया, उसके अंदर एक चमकदार और खूबसूरत लड़की की शरीर मिली। हैरत अंगेज़ तौर पर लड़की का शरीर देख कर ऐसा लग रहा था कि जैसे इसको मरते हुए चाँद ही घंटे गुजरे हो।

लेकिन ताबूत के अंदर लड़की का शरीर के अलावा एक और चीज़ भी थी। सारे ताबूत में गुलाबी रंग का पानी मौजूद था। जिसमे लड़की का शरीर को रखा गया था। खनिक वह पानी देख कर रह न सके और उन्होंने उस लड़की की शरीर को ताबूत से निकाला। जैसे जी शरीर को ताबूत से निकाला गया। तो वह लड़की का शरीर उसी वक़्त गलना शुरू हो गयी।

जब इसकी खबर प्राधिकरण को हुआ, तो फ़ौरन हेलीकॉपटर के जरिये इस ताबूत को विज्ञान प्रयोगशाला ले जाया गया। जहाँ वैज्ञानिकों ने उस गुलाबी रंग के पानी पर खोज शुरू कर दी। जिसने सालों पुरानी शरीर को गलने से बचा कर रखा था।

वैज्ञानिको का मानना था कि कई साल गुजरने के बाद इस पानी का वास्तविक सूत्र बदल गया है। इसको प्रतिलोम करना मुमकिन नहीं है। लेकिन एक बात तो पक्की है कि जिस ज़माने की यह शरीर थी उस वक़्त लोग आज के दौर से काफी ज्यादा बुद्धिमान थे।

15 हजार साल पुराने जानवर की खोपड़ी

अमेरिका का एक शहर मिशिगन का रहने वाला एक किसान जब अपनी फसल को उगाने के लिए खुदाई करवा रहा था। तो कुछ ही मीटर की गहराई पर उसे एक अजीब सी चीज़ दिखाई दी। यह देखते ही उसने खुदाई काम रुकवा दिया। उस चीज़ की सच्चाई जानने के लिए यह जमीन को काफी ज्यादा खोदना था, जिसके लिए मशीन की मदद ली गयी। और खुदाई का काम एक बार फिर से शुरू हो गया।

जैसे जैसे खुदाई का काम होता गया वैसे वैसे वह चीज़ जमीन के ऊपर और अच्छे से दिखने लगी। मालूम पड़ा की यह एक बहुत ही बड़े जानवर की खोपड़ी थी। उस किसान से रहा नहीं गया और उसने मिशिगन प्राधिकरण को इस बात से अवगत करवा दिया। जब इस जानवर की खोपड़ी को प्रयोगशाला में भेजा गया तो मालूम पड़ा कि यह एक ऐसे जानवर की खोपड़ी थी जो आज से 15 हजार साल पहले धरती पर रहते थे। जिसको ऊनी ममथ कहा जाता था।

देखने में यह जानवर हांथी जैसे हुआ करते थे। लेकिन यह बहुत ही खतरनाक माने जाते थे। यह माना जाता है कि हजारों साल पहले लोग इस जानवर के दन्त को निकाल कर हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया करते थे। यह जनावर ठन्डे और बर्फानी इलाको में रहते थे। लेकिन वक़्त के गुजरते गुजरते ग्लोबल वार्मिंग की वजह से इनकी नस्ल इस धरती से ही खत्म हो गयी।

एक इंसानी ढांचा

यूँ तो वक़्त के साथ साथ पुरातत्त्वज्ञ को कई अनोखी चीज़ें ज़मीन में दबी मिलती रहती है। लेकिन चौंका देने वाला वाक्यां 2012 में पेश आया। जब अफ्रीका के पहाड़ी इलाकों में एक ऐसा इंसानी ढांचा मिला, जिसकी लम्बाई आम इंसान की लम्बाई से कई गुना ज्यादा थी।

उसका सिर भी कई फुट लम्बा और चौड़ा था। विज्ञानं का मानना है कि कई हजारों साल पहले इंसान का कद लम्बा हुआ करता था। लेकिन वक़्त के गुजरते इंसानो का कद आहिस्ता आहिस्ता छोटा होता गया।

75 बड़ी बड़ी व्हेल मछली की हड्डी के ढांचे

चिल्ली के तटीय राजमार्ग के दौरान एक जगह ऐसा आ गया। जब राजमार्ग के मरम्मत का काम रोकना पड़ गया। यह काम चिल्ली के अटाकामा मरूस्थल में चल रहा था। जहाँ 120 फुट की ऊंचाई पर एक चट्टान के ऊपर पूरे 75 ढांचे मिले। वो भी व्हेल मछली के।

वहां के काम करने वाले लोगों को यह समझ नहीं आ रहा था। कि रेगिस्तान के बीचो बीच 120 फुट की ऊंचाई पर जहा से समंदर भी काफी दूर था। वहां एक ही साथ 75 बड़ी बड़ी व्हेल मछली की हड्डी के ढांचे क्या कर रहे थे ?

आखिरकार जब यह बात पुरातत्त्वज्ञ के पास पहुंची तो जाँच पड़ताल शुरू हो गयी। जिसमे यह मालुम पड़ा कि यह व्हेल मछली के ढांचे 20 लाख से 70 लाख साल पुराने है। और खोजकर्ताओं का मानना है कि इतने साल पहले ठीक यही जगह समंदर का साहिल हुआ करता था। क्यूंकि व्हेल मछली जब भी बीमार होती है तो उनकी फितरत होती है कि वह साहिल पर आ जाती है। लेकिन इतनी ज्यादा व्हेल मछली एक ही जगह पर कैसे मरी होंगी? इसके बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है।


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