अमीर भाई गरीब भाई

नमस्कार मित्रों, कैसे हैं आप सभी। आज हम आप सभी के लिए एक मजेदार और प्रेरणादायक कहानी लेकर आये हैं। जो कि आप सभी को बहुत ही अच्छी लगेगी। इस कहानी को आपको जरूर पढ़ना चाहिए। आप सभी को इस कहानी से काफी कुछ सीखने को मिलेगा। तो चलिए शुरू करते हैं आज की कहानी।

सूरजपुर नाम के एक गांव में एक छोटा सा परिवार रहता था। जिसमे महिला जिसका नाम रानी और उसके दो बेटे रहते थे। अपने पति के अचानक मृत्यु होने के बाद। घर का सारा काम रानी को करना पड़ता था। दो बेटो की परवरिश और उनके पढ़ाई लिखे करवाने में रानी का पूरा जीवन निकल गया। लेकिन जब उसके बच्चे बड़े हुए तो रानी को उनके लिए एक बड़ा फैसला लेना पड़ा।

रानी को अपनी परेशानी का हल निकालने श्रीधर के पास जाना

फिर एक दिन वह अपने पडोसी श्रीधर के पास गयी। तब श्रीधर ने रानी से पूछा। क्या हुआ बहनजी आप बहुत दुखी दिखाई दे रही हैं? घर में सब कुछ ठीक हैं न। तब रानी, श्रीधर से बोलती है कि श्रीधर भाई आप तो जानते ही है। कि मेने अपने दोनों बच्चो को बड़े मुश्किल स्तिथि में रह कर पाला है।

अब उनके शहर में जाकर कॉलेज की पढ़ाई करने का समय हो चुका है। लेकिन फ़िलहाल मेरे पास इतने पैसे नहीं है। जिससे कि में अपने दोनों बच्चो को आगे की पढ़ाई पूरी करवा सकूँ। ऐसे में मेने एक बेटे को नहीं पढ़ाया तो उसके साथ अच्छा नहीं होगा। तो श्रीधर भाई आप ही बताएं मैं क्या करूँ?

श्रीधर के द्वारा बताया गया समाधान

फिर श्रीधर अपने पड़ोसी रानी से बोला, रानी बहन कृपया आप शांत हो जाईये। इस समस्या का हल हम जैसे तैसे निकल ही लेंगे। तब श्रीधर ने रानी से पूछा। कि सबसे पहले आप यह बताएं कि आपके दोनों बेटों में से पढ़ाई में  होशियार कौन है?

तब रानी श्रीधर से बोली, कि मेरा बेटा राकेश पढ़ाई में ज्यादा होशियार है। वैसे तो राम  भी पढ़ाई में होशियार ही है। लेकिन राकेश तो राम से भी अच्छा है पढ़ाई में। तब श्रीधर बोलता है कि रानी बहन आपके समस्या का समाधान हो गया। आपके दोनों बेटों में से राकेश बड़ा भी है और पढ़ाई में भी होशियार है।

तो आप उसी को शहर में पढ़ाई करने के लिए भेज दीजिये। और अपने छोटे बेटे राम को अपने पास यही गांव में रखो। मेरी जान पहचान का एक हलवाई है जिसके यहाँ पर राम को नौकरी मिल जाएगी। मैं उस हलवाई से बात करके राम को उसके यहाँ नौकरी दिलवा दूंगा।

रानी की ख़ुशी

श्रीधर की इन सभी बातों को सुनकर रानी बहुत खुश होती है। और श्रीधर का धन्यवाद करती है क्यूंकि वह उसके समस्या का समाधान निकल दिया था। श्रीधर ने जैसा बताया था वैसा ही रानी ने किया। उसने अपने बड़े बेटे राकेश को शहर आगे की पढ़ाई करने के लिए भेज दिया।

और राम को उस हलवाई के पास काम करने के लिए भेज देती है। राम को पढ़ाई न करने का अफ़सोस बहुत था। लेकिन अपने घर की स्तिथि के कारण उसको काम करना पड़ रहा था। इसी वजह से राम ने अपनी आगे की पढ़ाई के लिए कोई जिद नहीं की।

तीन साल बीत जाने पर

इसी तरह दिन बीतते चले गए। अब 3 साल बाद राकेश की एक अच्छी कंपनी में मैनेजर की नौकरी लग जाती है। इसी ख़ुशी में राकेश घर जाता है। और अपनी माँ को मिठाई खिलता है। और बोलता है कि मेरी नौकरी एक बड़े कंपनी में लग गयी है। तब राकेश की माँ रानी बहुत ही खुश होती है। राकेश बोलता है कि कंपनी मुझे काफी अच्छी तनख्वाह भी देती है। अब जल्द ही हम सभी शहर में खुद का नया माकन बना कर रहेंगे।

राकेश का प्रमोशन

कुछ समय और बीतने के बाद राकेश का प्रमोशन जूनियर मैनेजर से सीनियर मैनेजर के पद पर हो जाता है। जिसके बाद राकेश अपनी माँ रानी को शहर लेकर जाता है। और वहां सभी ख़ुशी ख़ुशी रहने लगते है।

फिर एक दिन राकेश अपनी माँ से कहता है कि माँ मेरे कंपनी के मालिक अपने घर खाने पर आ रहे हैं। जब मेने उनको बताया कि मैं अपने पूरे  परिवार को गांव से यहाँ ले आया हूँ। तब वह बहुत ही खुश हुए। तब राकेश की माँ रानी बहुत खुश होती है और कहती है तो उनको बहुत आदर और सम्मान के साथ बुलाओ।

खाना कौन बनाएगा?

तब राकेश बोलता है कि माँ आप तो बीमार रहती है। तो ऐसे में खाना कौन बनाएगा? उसी समय राकेश का छोटा भाई राम उससे बोलता है। भैया आप चिंता न कीजिये, जब आप अपनी पढाई पूरी करने के लिए शहर आ गए थे। तबसे में गांव के एक हलवाई के यहाँ पर काम किया करता था। और वहां पर मेने खाना बनाने का काफी काम सीखा है। आप देखना ऐसे खाना बनाऊंगा कि खाने वाला खाना कहने के बाद भी उंगलिया चाटता रह जायेगा।

तब रानी का बड़ा बेटा राकेश अपने छोटे भाई राम से कहता है। राम तुम एक बात जरूर याद रखना कि मालिक साहब एक पांच सितारा होटल के मालिक भी है। खाना उसी हिसाब से बनाना।

बहुत सारे स्वादिष्ट व्यंजन

फिर राम अपने बड़े भाई राकेश से बोलता है कि आप इन सब बातों की टेंशन बिलकुल भी मत लीजिये। बस काम पर ध्यान दीजिये। देखना आपके मालिक के खाना खाने के बाद आपकी प्रमोशन पक्की होगी। राम के इस बात के कहने पर सभी हसने लगे।

अगले ही दिन राम खूब मन लगा कर बहुत सारे स्वादिष्ट व्यंजन बनता है। तभी अचानक घर के दरवाजे की घंटी बजती है। और राम अपने बड़े भाई राकेश से बोलता है। भैया लगता है कोई दरवाजे पर आया हुआ है। रुकिए में खोल कर देखता हूँ कि कौन आया हुआ है।

सभी को नमस्कार

तभी राम का बड़ा भाई राकेश बोलता है। राम रुक जा में जाता हूँ दरवाजा खोलने। मालिक क्या सोचेंगे कि कैसे कपडे पहने है इसके भाई ने। और तू घर के अंदर ही रहना। बाहर निकलने की बिलकुल भी जरूरत नहीं है।

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राम अपने भाई की इस बात पर बहुत ही उदास हो जाता है। और फिर बिना कुछ नही अंदर जाकर कहने की मेज सजाने लगता है। तभी राकेश के कंपनी के मालिक घर के अंदर आते है। और सभी को नमस्कार करते हैं। राकेश उनके बैठने के  कहता है।

मालिक राकेश से बोलता है कि आपका घर बहुत अच्छा है। आपकी माँ और भाई कहा हैं। तब राकेश अपनी माँ को बुलाता है। राकेश की माँ रानी, मालिक को नमस्कार करती है। और उनका हालचाल पूछने लगती है। तीनो आपस में  बातें करने लगते हैं। दूसरी तरफ राम उनके खाने की तयारी करने में लगा था।

बहुत ही स्वादिष्ट भोजन

कुछ देर बातें करने के बाद तीनो खाना खाने आते है। खाने की टेबल को सजा हुआ देख कर राकेश के कंपनी का मालिक काफी खुश होता है। राकेश अपने मालिक से पूछता है कि आपको यह खाना अच्छा लगा होगा। तब उन्होंने कहा बहुत ही स्वादिष्ट भोजन बनाया है।

और पूछते हैं कि इतना स्वादिष्ट भोजन किसने बनाया है? तब राकेश की माँ रानी बोलती है कि मेरे छोटे बेटे राम ने यह भोजन खुद अपने हांथों से आपके लिए बनाया है।

छोटे भाई राम के बारे में

तब कंपनी के मालिक राकेश से उसे छोटे भाई राम के बारे में पूछते हैं कि क्या वह अभी घर पर ही है? अभी तक तुमने मुझे अपने छोटे भाई से मिलवाया  नहीं। तब राकेश बोलता है कि वह खाना बनाने में व्यस्त है, इसलिए मेने आपसे मिलवाया नहीं।

तब रानी अपने छोटे बेटे राम को बुलाती है। तब राम हिचकिताता हुआ आता है। तब राकेश के कंपनी के मालिक राम की बहुत तारीफ करते हैं। वह राम से पूछते हैं कि क्या तुमने कही से खाना बनाने का कोर्स किया है? तभी बीच में राकेश बोलता है कि नहीं साहब यह तो हमारे छोटे से गांव में एक हलवाई की दुकान पर नौकर था। इसलिए थोड़ा बहुत खाना बना लेता है।

राम की तारीफ

अपने भाई की इन सभी बातों को सुन का फिर से दुखी हो जाता है। और खाना खाने के लिए वही सभी के साथ कुर्सी पर बैठ जाता है।

खाना खा कर उनके घर से जाने के पहले राकेश के कंपनी के मालिक राम की बहुत तारीफ करने लगते हैं। और वह राकेश की माँ रानी से कहता है कि आपके बेटा काफी होशियार को एक नौकरी देने के लिए कहते है।

एक नए बावर्ची की जरुरत

और कहते है कि हमें अपने होटल के लिए एक नए बावर्ची की जरुरत है। क्या राम वहां पर एक मुख्य रसोइया का काम करना पसंद करेगा? तभी राकेश बोलता है कि मेरे भाई राम ने इस काम के लिए कोई डिग्री नहीं ली है। कंपनी के मालिक कहते हैं कि मुझे उससे कुछ लेना देना नहीं है।

इसके हाँथो से बनाया गया खाना बहुत ही स्वादिष्ट है। मेरे लिए वही बहुत है। और वह राम से कल कंपनी आने के लिए कह देते है। और वही पर ऐसा स्वादिष्ट व्यंजन बनाकर खिलाना। लेकिन राम के बड़े भाई राकेश को यह बात बिलकुल भी पसंद नहीं आयी।

अगले दिन

अगल ही दिन राम होटल में जाकर खाना बनाना शुरू कर देता है। और अपने मालिक को अलग अलग प्रकार के व्यंजन बनाकर खिलता है। कंपनी के मालिक उसके हांथो का स्वादिस्ट भोजन करके बहुत ही खुश होते हैं।

राम का बड़ा भाई भी वही पर होता है। तो वह भी राम के द्वारा बनाये स्वादिष्ट व्यंजन को खाता है। और उसके द्वारा बनाए खाने की तारीफ़ भी करने लगता है। और आश्चर्यचकित हो जाता है कि खाना कितना स्वादिष्ट कैसे बना।

राकेश को सारी सच्चाई

तभी कंपनी के मालिक राकेश को सारी सच्चाई बताने के लिए कहते हैं। तब राकेश बोलता है कि राम मेने ही तुम्हारे द्वारा बनाए खाने में ज्यादा मिर्च और नमक डालने के लिए एक बावर्ची को कहा था। इस बात पर राम काफी उदास होता है और कहता है।

भैया आपने मेरी साथ ऐसा क्यों किया? तब राकेश अपने छोटे भाई राम को कहता है कि में नहीं चाहता था कि तुम इस कंपनी में काम करो। और तुम्हे मेरे जितनी तनख्वाह और जीवन शैली मिले। में चाहता था कि तुम ऐसे ही मेरे टुकड़ो पर जियो।

राकेश को नौकरी से निकाल देते है

तभी कंपनी के मालिक राकेश को नौकरी से निकाल देते है। तो ऐसे में राम कंपनी के मालिक से बोलता है कि सहाब ऐसा मत कीजिये। मेरा बड़े भैया दिल के बिलकुल भी बुरे नहीं है। आप उसे नौकरी से मत निकालिये।

तभी कंपनी के मालिक राकेश से बोलते है कि देखा राकेश तुमने अपने छोटे भाई राम के साथ इतना बुरा किया। लेकिन फिर भी तुम्हारा छोटा भाई तुमसे कितना प्यार करता है। इसी बात पर राकेश अपने मालिक से मांगता है। और राम से भी माफ़ी मांगता है।

तो ऐसे में राकेश को अपनी गलती का एहसास हो जाता है। और वह दोनों अपनी माँ रानी के साथ एक साथ हसी ख़ुशी जीवन बिताने लगते हैं।

इस प्रेरणादायक कहानी से सीख

तो इस कहानी के अंत में में आप सभी को बताना चाहूंगा कि हमें कभी भी किसी के साथ बुरा नहीं करना चाहिए। राकेश, राम का छोटा भाई होने के बावजूद ऐसा किया, जो कि उसे नहीं करना चाहिए था। आप जैसा जिसके साथ करेंगे वैसा ही आपके साथ भी होगा। तो आप किसी के बारे में न ही बुरा सोचिये और न ही कीजिए।

तो मित्रों, आप सभी को यह कहानी “अमीर भाई गरीब भाई” कैसी लगी। निचे दिए कमेंट बॉक्स में लिख कर जरूर बताएं।

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