किसान का जादुई बैल

एक समय की बात है, रामपुर नाम के एक छोटा से गांव था। जो कि बहुत ही हराभरा था। उस गांव के अधिकतर लोग खेती से और दूध बेच कर अपनी रोजी रोटी कमाते थे।

लेकिन रामपुर गांव में एक किसान ऐसा था। जिसका नाम श्याम था। जिसकी गांव में जमीन होने के बावजूद वह खेती नहीं कर सकता था। क्यूंकि उसकी जमीन बंजर थी। वह अपनी इस बंजर जमीन से बहुत ही परेशान था। उसने सभी तरकीब लगा ली उस जमीन को उपजाऊ करने के लिए। लेकिन कोई भी तरकीब काम नहीं आयी।

कभी भी हार नहीं मानता

इन सबसे निराश होकर श्याम अपनी किस्मत को कभी कभी कोसा करता था। लेकिन वह इन सब समस्याओं से कभी भी हार नहीं मानता था। वह रोज अपने बैलो से उस बंजर जमीन को इस उम्मीद से जोता करता था। कि एक दिन उसकी मेहनत रंग लाएगी। और उसकी यह बंजर जमीन उपजाऊ हो जाएगी।

अपने घर को चलाने के लिए श्याम ने दो गाय भी पाल रखी थी। जिनका दूध निकाल कर वह अपना पेट भरता था। लेकिन वह इन सबसे कुछ खास कमाई नहीं कर पाता था। क्यूंकि गाय और बैलों के चारे में ही उसकी आधी आमदनी चली जाती थी। जिसकी वजह से श्याम का गुजारा हो पाता था।

इतना होने के बावजूद वह अपने दोनों बैलों का बहुत अच्छे से ख्याल भी रखा करता था। और उन्हें कभी भी चारों की कमी नहीं होने देता था। जिसके कारण उसके बैल और गाय दोनों ही बहुत स्वस्थ थे।

राम नाम का किसान

श्याम के घर से थोड़ी दूरी पर राम नाम का किसान रहा करता था। जिसके पास गांव में जमीन तो बहुत थी। लेकिन वह अपने बैलों का बिलकुल भी ध्यान नहीं रखता था। वह उन्हें मारता पीटता और कभी कभी पूरे दिन उन बैलों से मेहनत करवाने के बाद भी चारा नहीं दिया करता था।

जिसकी वजह से उसके दोनों बैल बहुत ही कमजोर हो गए थे। इसीलिए जमीन होने के बावजूद उसके जमीन की पैदावार सही नहीं हो पाती थी। राम की नजर हमेशा श्याम के बैलों पर रहती थी। क्यूंकि श्याम के बैल बहुत ही स्वस्थ थे।

दोनों स्वस्थ बैलों को बेचने की चाह

राम किसी न किसी तरह उसके बैलों को हथियाना चाहता था। फिर एक दिन राम को वह मौका मिल ही गया। श्याम की आमदनी ज्यादा न होने के कारण उसके लिए दो गायों और दो बैलों को पालना मुश्किल हो रहा था। दोनों गाय तो उसकी आमदनी का जरिया थी।

लेकिन वह अपने दोनों स्वस्थ बैलों को बेचने की सोच रहा था। क्यूंकि उन दोनों बैलों से उसकी किसी भी प्रकार की आमदनी नहीं हो पा रही थी। उन दोनों के चारे का खर्चा बढ़ता ही चला जा रहा था। इसीलिए श्याम अपने उन दोनों बैलों को बेचना चाह रहा था। क्यूंकि वह अब उनका खर्चा और नहीं उठा पा रहा था।

खरीदार ढूँढना शुरू

अब श्याम ने अपने दोनों स्वस्थ बैलों के लिए खरीदार ढूँढना शुरू कर दिया। जैसे ही राम को इस बात के बारे में पता चला कि श्याम अपने दोनों स्वस्थ बैलों को बेचना चाहता है। तब वह तुरंत दौड़ता हुआ श्याम के पास जाता है। जिससे की उससे पहले कोई और उन दोनों स्वस्थ बैलों को श्याम से खरीद न ले जाये।

राम जब श्याम के घर पंहुचा। तब उससे बोला कि क्यों श्याम भैया हमने सुना है की आप अपने दोनों बैलों को बेच रहे हो। श्याम ने राम से बोला हाँ तुमने सही सुना है।

मैं अब इन दोनों बैलों का खर्च और नहीं उठा सकता। मेरे खेत भी उपजाऊ नहीं हुए। और आमदनी भी उतनी खास नहीं है। में तो चाह कर भी इन दोनों को अपने पास नहीं रख सकता।

कितने में बेचोगे

तो श्याम की पूरी बात सुनने के बाद राम बोला। अरे श्याम भैया कोई बात नहीं है। आप तो बस ये बताओ कि इन दोनों स्वस्थ बैलों को आप कितने में बेचोगे। श्याम बोला मेरे पास जो दोनों बैल है जिन्हे आप भी देख सकते है। दोनों ही स्वस्थ और सुन्दर भी है।

अगर मुझे अपने दोनों स्वस्थ बैलों के लिए 50 अशर्फियाँ मिल जाये तो बुरा तो बिलकुल भी नहीं होगा। वैसे तो श्याम ने अपने बैलों का उचित ही दाम माँगा था। लेकिन ऐसे में राम तो श्याम से काफी चालाक था। और श्याम के उन दोनों बैलों को सस्ते दामों में खरीदने चाहता था।

कितने में खरीदोगे?

इसीलिए राम चौंकते हुए श्याम से बोला अरे श्याम भैया ये तो आप काफी महंगा बता रहे हो। और आप तो जानते ही होंगे कि आज कल बैल कितने सस्ते हो गए है। और श्याम भैया आपके दोनों ही बैल तो बूढ़े हैं। इतना ज्यादा दाम तो कोई जवान बैलों का भी नहीं लेता।

श्याम निराश होकर बोला ठीक है श्याम भाई आप ही बताओ कि मेरे इन दोनों बैलों को आप कितने में खरीदोगे? राम ने श्याम से बोला कि 30 अशर्फियों से एक अशर्फी ज्यादा नहीं दूंगा। श्याम अपने दोनों बैलों के इस दाम से खुश नहीं था। लेकिन उसके पास उन दोनों बैलों को बेचने के अलावा कोई और रास्ता भी नहीं था। क्यूंकि उसको पैसों की बहुत ज्यादा जरूरत थी।

बैलों को बेच दिया

इसी वजह से श्याम ने राम को 30 अशर्फियाँ लेकर अपने दोनों ही स्वस्थ बैलों को बेच दिया। अपने बैलों को बेचने के बाद श्याम काफी दुखी रहने लगा। क्यूंकि श्याम को अपने दोनों ही बैलों से काफी लगाव था। लेकिन उसके पास उन दोनों को बेचने के अलावा कोई और रास्ता भी नहीं था।

एक दिन जब श्याम अपने गायों का दूध बेच कर घर जा रहा था। तब उसने देखा कि उसके घर के बाहर एक बैल खड़ा था। वैसे तो दिखने में वह बैल स्वस्थ और अच्छी नस्ल का लग रहा था। श्याम उस बैल को अपने घर पर देख कर काफी हैरान हो गया।

और बोलने लगा कि आखिर इतने गजब बैल को कौन मेरे घर पर छोड़ कर चला गया। ऐसा बैल तो मेने अपनी जिंदगी में आज तक नहीं देखा। लेकिन हो सकता है कि शायद इस बैल का मालिक थोड़ी देर में यहाँ पर आ कर इसको लेकर चला जाये।

चिल्ला चिल्ला कर आस पास पूछा

ऐसा कहने के बाद श्याम चिल्ला चिल्ला कर आस पास पूछा भी कि यह बैल किसका है। लेकिन कोई भी उस बैल को लेने नहीं आया। श्याम ने अपने घर के बाहर बैठ कर इंतज़ार भी किया लेकिन शाम होने को आयी कोई भी उसको लेने के लिए नहीं आया।

इंतज़ार करने के बाद भी जब उस बैल को कोई भी लेने के लिए नहीं आया। तब हर थक कर श्याम ने उस बैल को अपने घर पर ही खूटे से बैठ लिया।

खेत को जुतवाना शुरू

अगले ही दिन श्याम उस बैल को लेकर अपने खेत की तरफ गया। और उसकी पीठ पर हल लाद कर खेत को जोतने लगा। जैसे ही श्याम ने उस गजब के बैल से खेत को जुतवाना शुरू किया। उसको अपनी ही आँखों पर विस्वास नहीं हुआ। उसने देखा कि जहाँ जहाँ पर वह बैल खेत को जोतता जा रहा था।

उस जगह पर नए नए पौधे उगते चले जा रहे थे। श्याम ये सब कुछ देख कर काफी हैरान हुआ। कि जिस जमीन पर आज तक घास तक नहीं उगी थी। उस जमीन पर इस बैल के पैर रखते ही उग रहे हैं। उस दिन वह बैल श्याम के खेत की पूरे दिन जुताई किया। लेकिन एक बार भी नहीं रुका।

खाने के लिए चारा दिया

शाम होते ही श्याम उस बैल को अपने घर लेकर आया। तब उसको खाने के लिए चारा दिया। और वह बैल थोड़ा सा चारा खा कर रुक गया। क्यूंकि उसका पेट उतने में ही भर गया था।

श्याम यह सब कुछ देख कर समझ गया था। कि जो बैल उसके घर पर है वह कोई मामूली बैल नहीं है। बल्कि एक जादुई बैल है। जिसने उसके बंजर जमीन को उपजाऊ जमीन बना दिया। श्याम बोला कि यह बैल तो पूरे दिन काम करता रहा। और इसके पैर रखने से ही मेरी पूरी बंजर जमीन उपजाऊ हो गयी। और थोड़े सा ही चारा से इसका पूरा पेट भर गया। वह तो कोई बैल नहीं बल्कि बैल के रूप में मेरे लिए भगवान है।

खूब मेहनत करता

अब उस दिन से श्याम उस बैल का काफी ध्यान रखने लगा। और अपने खेत पर उस बैल के साथ खूब मेहनत भी करता था। आखिर उसकी मेहनत रंग ले। और उसकी उपजाऊ जमीन की पहली फसल हुई। इस बार गांव में सबसे अच्छी फसल श्याम की ही हुई थी।

गांव में जब सभी को यह बात पता चली तब काफी लोग श्याम को उसके घर पर बधाई देने के लिए पहुंच गए। जिनमे से एक राम भी था। गांव वालो ने श्याम से कहा अरे बेटा श्याम ऐसा तुमने क्या चमत्कार किया। कि तुम्हारी बंजर जमीन पर इतनी हरी भरी और शानदार फसल तैयार हुई है।

श्याम गांव वालो से बोला अरे चाचाजी यह सब चमत्कार इस अद्भुत बैल का है। यह बैलो पूरे दिन कहित पर मेहनत कर सकता है। और जल्दी थकता भी नहीं है। इसी अद्भुत बैल की वजह से मेरी बंजर जमीन उपजाऊ हो गयी।

आश्चर्यचकित रह गए

गांव वालो ने जब उस बैल को देखा तब सभी उसको देख कर आश्चर्यचकित रह गए। उन सभी में से किसी ने ही आज तक इतना स्वस्थ और सुन्दर बैल नहीं देखा था। राम को उस बैल को देख कर बहुत चिढ मची। क्यूंकि उस गांव में सबसे ज्यादा जमीन होने के बावजूद उसकी फसल अच्छी नहीं हो रही थी।

और श्याम की तो बंजर जमीन से इतनी अच्छी फसल हुई। लेकिन ऐसे में राम इसका कुछ कर भी नहीं सकता था। श्याम को मुबारकबाद देने के बाद सभी गांव वाले अपने अपने घर को लौट गए। धीरे धीरे श्याम अच्छी खासी कमाई करने लगा। और हर साल सबसे अच्छी फसल श्याम के खेत में ही होती थी।

कुछ सालों बाद

ऐसे ही चलता रहा और कुछ सालों बाद श्याम ने अपने उसी गांव में एक बहुत ही बड़ी जमीन खरीद लिया। जिससे अब उसके पूरे गांव में सबसे ज्यादा जमीन उसी के पास थी। लेकिन इतनी संपत्ति होने के बाद भी श्याम को उसका जरा भी घमंड नहीं थी। वह रोज उस बैल की सेवा किया करता था। उसकी अच्छे से देखभाल किया करता था।

फिर एक दिन गांव जब सभी एक जगह बैठ कर बातें कर रहे थे। तभी उनमे से एक आदमी बोला अरे राम भैया आपकी फसल अच्छी नहीं हो रही है। अब तो अपने इस गांव में सबसे ज्यादा जमीन भी श्याम भैया के पास ही है। इतना कहने पर राम को चिढ मची। राम तो पहले से ही श्याम से चिढ़ा हुआ था। और जब गांव वालों ने ऐसी बात कही तब उसको उनकी इस बात पर बहुत चिढ मची।

गुस्से में

गुस्से में आ कर राम उस आदमी को मरने लगा। और बोला कि अगर आगे से तूने ऐसा कुछ मुझसे बोला तो में ऐसा मार मरूंगा कि तेरा चलना फिरना बंद हो जायेगा। और अगर बात करें जमीन की तो तुम देखना फिर इस में गांव में सबसे ज्यादा जमीन लेकर दिखाऊंगा। इतना कहकर राम गुस्से में अपने घर की ओर चला जाता है।

घर जाकर वह सोचने लगाता है और बोलता है कि में आज रात उस श्याम को मार कर उसकी जमीन और उसका बैल को हड़प लूंगा। और फिर में इस गांव में सबसे अमीर बन जाऊंगा। फिर रात होते ही राम एक चाकू लेकर श्याम के घर की तरफ जाता है। चुपके से वह श्याम के घर में घुस जाता है। वहां पर राम देखता है कि श्याम और उसका बैल दोनों ही सो रहे थे।

श्याम की नींद नहीं खुली

राम को देखते ही श्याम का बैल जग जाता है और खड़ा हो जाता है। और राम को देखते ही अपने सिंघों को जोर जोर से हिलाने लगा। लेकिन उसकी इस आवाज से श्याम की नींद नहीं खुली। बैल खूटे में बंधे होने के कारण कुछ भी नहीं कर पा रहा था।

राम चाकू निकाल करके श्याम की तरफ जाता है। तभी अचानक से बैल बहुत तेज चिल्लाने लगा। जिससे श्याम की नींद खुल गयी और वह उठ गया। लेकिन जैसे ही वह उठा राम ने उसके हाथ पर चाकू से हमला कर दिया। जिससे श्याम घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा। श्याम को इस हालत में देख कर उसका बैल जबर्दस्ती खूटे से रस्सी तोड़ कर राम की तरफ दौड़ा। और राम को अपने सिंघो से इतना तेज़ मारा कि उछाल कर जमीन पर गिर पड़ा।

शाही सैनिकों के हवाले कर दिया

इतना शोर शराबा होने के बाद गांव वाले श्याम के घर की तरफ आये। और देखा कि श्याम घायल हो कर जमीन पर गिरा हुआ है। और ऐसा देख कर उन सबने राम को पकड़ लिया। और उसको शाही सैनिकों के हवाले कर दिया। जिन्होंने उसको जेल में ले जाकर डाल दिया।

श्याम की मरहम पट्टी करके गांव वालो ने उसके बैल की काफी तारीफ की। इसके बाद श्याम अपना जीवन हसी ख़ुशी व्यतीत करने लगा। और खेती करके ख़ुशी ख़ुशी अपना जीवन बिताने लगा।

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