क्या चाँद पर पानी है? आखिर कितना पानी चाँद के सतह पर मौजूद है?

हमारी पृथ्वी से 3 लाख 84 हजार 400 किलोमीटर दूर स्तिथ खूबसूरत चाँद। हमेशा से हम धरतीवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। यूँ तो चाँद पृथ्वी से बहुत खूबसूरत दिखता है। लेकिन कुछ समय पहले तक, यह समझा जाता था कि चन्द्रमा पर पानी का कोई नमो निशान नहीं था।

लेकिन 18 नवम्बर 2008 को हुए, भारतीय स्पेस एजेंसी (इसरो) के सर्वक्षणों के आधार पर यह पहले ही साबित हो चुका था। कि चन्द्रम के सतह पर भी पानी मौजूद है। और अभी हाल ही की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार नासा के वैज्ञानिकों ने चन्द्रमा पर पानी होने की पुष्टि की है। चण्द्रमा पर पानी की खोज होने के साथ ही, हमारे ज़हन में कुछ सवालों का उठना लाज़मी है।

जैसे कि चन्द्रमा पर पानी की खोज सबसे पहले किस देश द्वारा की गयी थी और किस तरह की गयी? क्या इस खोज से अंतरिक्ष के और भी भी रहस्य सुलझेंगे? वहां पर मौजूद पानी हम मनुष्यों के इस्तेमाल करने लायक होगा क्या? क्या चन्द्रमा पर पानी की सतह मिली है, इससे वहां इंसानी आबादी बसाने में अब मदद मिलेगी? आखिर कितना पानी चाँद के सतह पर मौजूद है? जब चाँद पर धरती के समान कोई वयुमण्डल ही नहीं तो यह पानी आया कहाँ से?

आज के इस आर्टिकल में हम इन्ही सभी बातों की सम्पूर्ण जानकारी आपको देंगे। सबसे पहले बात करते हैं कि चन्द्रमा पर पानी की खोज से होने वाले लाभ के बारे में ।

चन्द्रमा पर पानी की खोज से होने वाले लाभ

अभी हाल ही में अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा ने चंदमा के सतह पर पानी की खोज की। पानी क खोज वहां हुई है, जहाँ पर सूरज की किरणे सीधी पड़ती हैं। इस बड़ी खोज से न केवल चन्द्रमा पर भविष्य में होने वाले मिशन को बड़ी मजबूती मिलेगी। बल्कि इसका उपयोग शायद पीने के पानी के रूप में हो सकेगा। और राकेट ईंधन के उत्पाद के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

यदि हम वर्तमान की बात करें, तो आज मानव जब अंतरिक्ष की यात्रा पर जाता है। तो अपने साथ भोजन और पानी समेत सभी साधन लेकर उसे जाना होता है। अगर चाँद पर हमें पानी मिल जाता है तो इससे अंतरिक्ष यात्रियों को बड़ी मदद मिलेगी। तब उस स्तिथि में अपने मिशन पर कम से कम यात्रा में पानी लेकर जाना होगा।

वाशिंगटन में नासा मुख्यालय में विज्ञानं मिशन निर्देशालय में खगोल भौतिकी के निर्देशक पॉल हेड्स ने कहा। कि हमारे पास पहले से संकेत थे, कि पानी चन्द्रमा के सतह पर सूर्य की और मौजूद हो सकता है। अब इससे हमें जीवन की खोज के बारे नयी जानकारियां मिलेंगी।

चाँद पर कितना  पानी?

चन्द्रमा पर पानी की खोज, नासा की अवरक्त खगोल विज्ञान के लिए समताप मंडल वेधशाला (सोफ़िया) की है। सोफिया ने चन्द्रमा की सतह पर जितने पानी की खोज की है, उसकी मात्रा अफ्रीका की सहारा रगिस्तान में मौजूद पानी की तुलना में 100 गुना कम है। मतलब इतना कम पानी पानी आखिर चन्द्रमा के सतह पर कैसे आया?

और दूसरा सवाल आखिर कैसे यह पानी चन्द्रमा के कठोर और वायुविहीन वायुमंडल में बना रहता है? चाँद पर पानी की खोज से जुडी एक खगोलीय वैज्ञानिक केसी होनिब्ले ने कहना है कि यह बहुत ही हैरानी की बात है। कि चाँद पर पृथ्वी की तरह का कोई वातावरण नहीं है। फिर भी चाँद के प्रकाश वाले क्षेत्र में पानी का मिलना बहुत ही आश्चर्यजनक है।

इसका मतलब है कि चाँद पर कुछ ऐसी शक्ति है जो इसके वजह से वहां पानी मौजूद है। या फिर और क्या वजह है जो बिना वायुमंडल के वहां जल है। वैसे सूरज की रौशनी चाँद पर गड्ढों में कभी भी नहीं पहुँचती। इन गड्ढों का तापमान बहुत ही कम है। जिससे वहां का पानी जम जाता है। बहराल जो भी हो, इसका पता वैज्ञानिक आगे की खोज करके ज़रूर लगाएंगे।

चन्द्रमा की सतह पर पानी बनता कैसे है?

अब सवाल यह उठता है कि चन्द्रमा की सतह पर पानी बनता कैसे है? और सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि ये चन्द्रमा के कठोर और वायुमंडलीय वातावरण में कैसे बना रहता है?

भारतीय स्पेस एजेंसी ने बताया था कि चाँद पर पानी तरल रूप में न होकर बर्फ के रूप में है। इसके बारे में एक वैज्ञानिक ने बताया था कि हिमभंडार चन्द्रमा पर ऐसे स्थान पर हे। जहाँ का तापमान शून्य से लगभग 150 डिग्री सेल्सियस निचे चला जाता है। भारतीय स्पेस एजेंसी के मुताबिक और जिसकी पुष्टि नासा ने भी की थी।

पिछले खोज के दौरान, चाँद के सतह पर हाइड्रोजन के कंपोनेंट्स मौजूद होने का खुलासा हो चुका था। लेकिन तब हाइड्रोजन और पानी के निर्माण के लिए जरुरी कंपोनेंट्स हीड्रोसिल की गुत्थी नहीं सुलझा सकी थी।

नासा की अगले मिशन 2024 के आर्टिमिस प्रोग्राम के तहत नासा चाँद पर पहली महिला और दूसरा पुरुष भी भेजने वाला है। नासा को इस मिशन से पहले चाँद पर जल संसधान के बारे में और अधिक जानकारी मिलने की उम्मीद है। एजेंसी को इस दशक के अंत तक चाँद पर एक स्थाई मानव आबादी बसाने की उम्मीद है।

किस देश ने और कैसे चन्द्रमा पर सबसे पहले पानी की खोज की?

अब सवाल यह उठता है, कि आखिर किस देश ने और कैसे चन्द्रमा पर सबसे पहले पानी की खोज की? तो इसका जवाब है, हमारे देश भारत ने चन्द्रमा पर सबसे पहले पानी की खोज की। और हमें गर्व है इस खोज पर।

भारत द्वारा जब चन्द्रयान 1 को लांच किया गया था। इस चंद्रयान 1 ने नासा का एक उपकरण पर खनिज विज्ञान मैपर लगा हुआ था। यह प्रोजेक्ट इसरो की वजह से ही आरंभ हुआ था। इसरो ने पहली बार पानी की खोज की थी। उस समय यह पुष्टि नहीं हो पाया था कि ये हीड्रोसिल हे या हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का मिश्रण।

मतलब ऑक्सीजन का कोई मॉलिक्यूल है या पानी। लेकिन अब यह पुष्टी हो गया है कि वह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का मिश्रण ही है। इसके लिए चाँद के ध्रुवीय क्षेत्र पर इसरो के वैज्ञानिकों ने ढाई किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से चाँद के सतह पर अपने अंतरिक्ष यान का एक भाग गिराकर ध्वस्त करवाया था। जिससे 25 मीटर लम्बा एक गड्ढा बना। जो कि 4 किलोमीटर तक गहरा था।

इस क्रैश से लगभग 10000 टन मटेरियल उडा, जब इस क्रैश की वजह से मटेरियल ऊपर उड़ा। तब सूरज के रौशनी से उड़ते कण दिखने लगे। तब इन कणो मे से और जिन कणों में पानी था, उन कणो को ढूंढ लिया गया। 5.6 प्रतिशत पानी इन कणो में मौजूद था। तब इस मानव रहित भारतीय मिशन ने सर्व प्रथम पता लगाया था कि चाँद के सतह पर बहुत अधिक मात्रा में हिमखंड मौजूद है। जिससे चाँद पर जल की उपलब्धता निश्चित हुई है।

सोचने वाली बात

अब सोचने वाली बात यह है कि चाँद के सतह का तापमान लगभग 123 डिग्री तक पहुँच जाता है। जिससे पानी भाप बन कर उड़ सकता है। फिर चाँद पर पानी कैसे हो सकता है। इसीलिए भारत के इसरो ने पानी की खोज चाँद की ध्रुवीय क्षेत्र में की। जहाँ पर सूरज की रौशनी चाँद पर स्तिथ गड्ढो में कभी नहीं पहुँचती।

इन गड्ढों का तापमान बहुत ही कम है। जिससे वहां का पानी जम जाता है। इस खोज को आधार मान कर ही, अनेक देशों की एजेंसी भी चाँद पर जल की उप्लभ्दता की खोज करती रही है। जिसमे हाल ही में स्पेस एजेंसी नासा द्वारा चाँद के सतह पर जल मौजूद होने की पुष्टि की गयी है।

नासा ने अपनी पानी की खोज वहां की है, जहाँ पर सूरज की सीखी किरणे पड़ती है। पानी का पता एक फ्लेवियस नाम के गड्ढे में लगाया गया है। जो पृथ्वी से भी दिखता है।

इंसानी जीवन जीने की लिए पानी अनिवार्य है। फिर वहां इंसानी आबादी को बसाने का इरादा कैसे इतना कारगर सभीत होगा? जब तक नासा के वैज्ञानिक इन सवालों के जवाब नहीं ढूंढ लेते, तब तक यह सवाल हमारे सामने एक रहस्य ही बने रहेंगे। अगर चाँद पर पानी की खोज हो जाती है, तो इससे अंतरिक्ष से जुडी कई सारे रहस्य भी उजागर होने की संभावना है। चाँद पर जीवन की कल्पना साकार रूप ले सकती है।


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