क्या होता अगर पृथ्वी होती बृहस्पति ग्रह का चाँद?

क्या होता अगर पृथ्वी होती बृहस्पति ग्रह का चाँद?: हमारी धरती बेहद सुंदर और सुहाना ग्रह है। जहाँ हम मनुष्य वर्षों से रह रहे हैं। कभी बारिश तो कभी जमाने वाली ठण्ड और वहीँ कभी चिलचिलाती गर्मी। चाहे जैसा मौसम हो आपको एक बात तो मानना ही पड़ेगा। कि हम सब बेहद खुशनसीब हैं, जो इस ग्रह पर धरती पर अपने जीवन को गुजार रहे हैं। यकीन नहीं होता तो आज के इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें। और पूरा पढ़ने के बाद आपको पता चल जायेगा कि आप कितने खुशनसीब हैं।

पृथ्वी, सूरज से हमारे सौरमंडल का तीसरा ग्रह। और सौरमंडल का एकमात्र ग्रह जहाँ जीवन भलीभांति पनप रही है। लेकिन पृथ्वी का सूरज से एक निश्चित दूरी पर होना, यहाँ का मौसम इतना रहने योग्य होना। यह सब वाकई में बहुत अनोखी बात है। अगर मान लीजिये ऐसा नहीं होता तो क्या होता? अगर पृथ्वी अपनी जगह पर न होकर हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह, बृहस्पति का चाँद होता तो क्या होता?

बृहस्पति ग्रह, सूरज से हमारे सौरमंडल का पांचवा ग्रह है। जो सूरज से करीब 77,85,00,000 किलोमीटर की दूरी पर है। यहाँ सूरज की रौशनी और सूरज की गर्मी धरती के मुकाबले 25% कम पहुँचती है। लेकिन क्या आपको पता है बृहस्पति ग्रह का आंतरिक तापमान सूरज के सतह के तापमान से भी कही ज्यादा गर्म है। लेकिन ऐसा क्यों? यह जानने के लिए आज के इस आर्टिकल को जरूर पूरा पढ़ें।

ग्रहों के पास चन्द्रमा

तो बृहस्पति ग्रह के पास वर्तमान में 89 चन्द्रमा हैं। हमारे पृथ्वी के पास सिर्फ 1 चन्द्रमा है। मार्च 1610 में, जब गैलिलिओ गैलिली ने टेलिस्कोप की मदद से पहली बार जब बृहस्पति ग्रह की तरफ देखा था। तब उन्हें उस ग्रह के 4 बड़े बड़े चन्द्रमा दिखे थे। जो थे आएओ, यूरोपा, गैनिमीड और कलिस्टो। बाद में जब हमने वॉयजर 1 और गैलिलिओ जैसे अंतरिक्षयान को बृहस्पति ग्रह के पास भेजा। तब वहां उस ग्रह के पास चन्द्रमा की भरमार है। उनमे से कई बेहद छोटे है, इतने छोटे जिन्हे पृथ्वी से देखा नहीं जा सकता।

हमने इन अंतरिक्षयान के जरिये, न केवल बृहस्पति ग्रह के चन्द्रमा को देखा था। बल्कि हम इनसे बृहस्पति ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र और गुरुत्वाकर्षण के बारे में कई जानकरी मिली थी। बृहस्पति ग्रह का चुंबकीय क्षेत्र हमारी धरती के चुंबकीय क्षेत्र की तुलना में 10 गुना ज्यादा मजबूत है और कही ज्यादा बड़ा है। इसका चुंबकीय क्षेत्र इतना बड़ा है कि अगर हम इसे रात के आसमान में देख पाते तो यह हमे चाँद से भी बड़ा दिखता।

चुंबकीय क्षेत्र

अब बात करते हैं कि अगर इसके चुंबकीय क्षेत्र में हमारी धरती भी होती। यानि पृथ्वी बृहस्पति ग्रह का चाँद होता तो क्या होता? क्या हम पृथ्वी में रह पाते? या फिर यहाँ रहना हमारे सही नहीं रहता। बृहस्पति ग्रह का एक चाँद है यूरोपा, जो की एक बर्फीला पिंड है। इसके एक चाँद में बर्फ की एक मोटी परत जमी हुई है। और वहीँ बृहस्पति ग्रह का एक और चाँद है, आएओ। जो कि गर्म लावा से तप रही है। इस ग्रह के एक चाँद पर लगातार ज्वालामुखी विस्फोट होते ही रहते हैं। और इस चाँद के सतह पर एक मिनट भी बिताना सही नहीं है।

अगर धरती बृहस्पति ग्रह के सेण्टर से करीब 8 करोड़ किलोमीटर के अंदर चला जाये। तो पृथ्वी भी इसका एक चाँद बन जायेगा। और यह सूरज के साथ साथ बृहस्पति ग्रह का भी चक्कर काटने लगेगा। इस स्तिथि में आसमान का नजारा बेहद आकर्षक होगा। लेकिन क्या हम यहाँ रहे पाएंगे?

दूरी

सबसे पहली चीज़ बृहस्पति ग्रह, सूरज से करीब 77,85,0000 किलोमीटर की दूरी पर है। यानि पृथ्वी की तुलना में करीब 5 गुना दूरी पर है। और इतने दूर होने की वजह से वह जगह काफी ठंडा है। और कम रौशनी वाला है। यानि हमें यहाँ पहले के मुकाबले 25% कम रौशनी और 25% कम गर्मी मिलेगी।इसी के साथ जैसा कि मेने आपको बताया था कि बृहस्पति ग्रह का चुंबकीय क्षेत्र बहुत ज्यादा मजबूत है। यह हमे सूरज से आने वाले हानिकारक रेडिएशन से तो बचाएगा ही।

लेकिन इसके चुंबकीय क्षेत्र से निकलने वाले रेडिएशन से हमे कौन बचाएगा? इस ग्रह से निकलने वाले रेडिएशन पृथ्वी से निकलने वाले रेडिएशन के तुलना में 1000 गुना ताकतवर है। इससे बचने के लिए हमे सतह के नीचे आश्रय लेकर रहना होगा। लेकिन क्या हम उसमे भी सुरक्षित रहेंगे? बृहस्पति ग्रह के बड़े आकार और ज्यादा द्रव्यमान होने के कारण इसकी गृरत्वाकर्षण भी बहुत ही ताकतवर है।

ज्वारीय बल

बृहस्पति ग्रह का एक चाँद आएओ, जो गर्म लावा में तप रहा है, लेकिन क्यों? इसका कारण है इस ग्रह कि गुरुत्वाकर्षण। इस ग्रह की तेज़ गुरुत्वाकर्षण, चाँद आएओ पर ज्वारीय बल लगती है। जिस तरह हमारा चाँद धरती पर ज्वारीय बल लगता है। जिसके वजह से धरती पर ज्वारभाटायें आती है।

लेकिन चाँद आएओ पर एक भी ज्वारीय बल नहीं लगता। बल्कि इसकी पूरी बॉडी इस बल की वजह से स्क्वीज़ जाती है और इसी कारण इसका आंतरिक भाग इतना अस्थिर है।  तो अगर हमारी धरती इस जगह पर होगी, तो धरती पर निरंतर विस्फोट और तेज़ भूकंप का आना जान लगा रहेगा। यानि इस जगह पर हमारा रहना लगभग नामुमकिन होगा।


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