चालाक नौकर

एक समय की बात है, राजपुर नाम के एक गांव में सभी परिवार हसी और ख़ुशी से अपना अपना जीवन अच्छे से व्यतीत कर रहे थे। उस गांव में सूरज नाम का एक व्यक्ति रहता था। जिसके साथ उसकी बीवी रमा और एक छोटा बच्चा रहा करते थे। लेकिन एक दिन सूरज की तबियत कुछ ऐसी बिगड़ी की वह सबको छोड़ कर भगवान को प्यारा हो गया।

उसके जाने के बाद उसकी बीवी रमा और उसका छोटा बच्चा दोनों ही अब अकेले पड़ गए थे। सूरज के घर में वह अकेला ही ऐसा था जो घर में कमाने वाला था। लेकिन अब उसके जाने के बाद उसके घर में कोई भी कमाने वाला नहीं था।

रामू काका

फिर एक दिन पास ही में रहने वाले रामू काका, रमा के घर आये। और बोले क्या हुआ रमा बेटी अगर तुम ऐसी ही बैठी रही तब तुम्हारे घर का काम कैसे चलेगा। तब रमा बोली में अकेली क्या करूंगी, अब तो श्याम के पिताजी भी नहीं रहे। अब इस छोटे से बच्चे को में पालन पोषण कैसे करुँगी? और इस छोटे से बच्चे के साथ मेरी पूरी जिंदगी कैसे चलेगी? मुझे तो बिलकुल भी कुछ समझ में नहीं आ रहा है।

तब रामू काका, रमा से बोले कि रमा बेटा तुम्हारे हांथो में माँ अन्नपूर्णा का वास है। बाजार में जो अपनी जमीन खाली पड़ी है। वहां पर एक अच्छा सा होटल खोलते हैं। तुम्हारे हाँथ का खाना जो कोई व्यक्ति खा ले वह बार बार तुम्हारे पास खाने आये।

छोटे ठाकुर मोहन का होटल

फिर रमा, रामू काका से बोली कि काका उसी जमीन के पास गांव के छोटे ठाकुर मोहन का होटल है। उनका होटल तो काफी समय से वहां पर है। और क्या उस होटल का खाना छोड़ कर लोग हमारे नए होटल में खाना खाने आएंगे? रमा की इस बात को सुन कर रामू काका बोले बेटी तुम इस बात की चिंता बिलकुल भी मत करो।

तुम्हारा होटल खुलने के बाद बहुत सारे लोग आएंगे। तुम बस अपनी हाँ कर दो, जिससे हम होटल की शुरुवात कर सके। और बाकी सब चिंता मेरे ऊपर छोड़ दो। रमा बोली ठीक है रामू काका आपको जैसा ठीक लगे। आप जैसा कहेंगे वैसा ही में करुँगी और में हमेशा आपके साथ हूँ।

होटल बनने का काम

अब रमा के होटल बनने का काम जोरो शोरो से चालू हो जाता है। और फिर एक दिन ऐसा आता है जब रमा का होटल बन का पूरी तरह तैयार हो जाता है। वहां पहले से ही छोटे ठाकुर मोहन का होटल था। वह रमा के होटल को देख कर बोलता था कि देखता हूँ कैसे चलता है यह होटल।

फिर इसी में छोटे ठाकुर मोहन का नौकर बोलता है कि मालिक देखो आपके होटल के सामने ही रमा ने नया होटल खोला है। छोटे ठाकुर मोहन बोला चिंता नहीं करो इस होटल को जल्द ही में बंद करवाता हु। वह है कर अपने नौकर से बोलता है। जा जाकर तू अपना काम कर में इन सबको देख लूंगा।

नए होटल का उद्घाटन

अब वह दिन आता है जब रमा और उसके रामू काका उस नए होटल का उद्घाटन करते हैं। तभी रमा बोलती है रामू काका क्या हम इस होटल को चलने में कामियाब हो पाएंगे। रामू काका कहते हैं रमा बेटी तुम चिंता नहीं करो सब हो जायेगा।

शुरू शुरू में कुछ ग्राहकों को खिंच कर लाना पड़ेगा। तब रमा बोली ये सब कैसे होगा? तब रामू काका काफी सोच समझ कर बोलते हैं कि इसके लिए हमें कुछ जबरदस्त करना होगा। तुम बस देखती जाओ यह बूढ़ा आदमी तुम्हारे इस शानदार होटल के लिए क्या क्या करता है?

योजना

एक तरफ रमा के होटल का उद्घाटन चल रहा था। और दूसरी तरफ छोटे ठाकुर मोहन उनके होटल को बंद करने के बारे में योजना बना रहा था। और सोच रहा था कि मेरे इस होटल के कारोबार में किसी प्रकार का नुक्सान नहीं होने दूंगा। चाहे कितना भी करीबी रिस्तेदार क्यों न हो।

तभी अचानक एक ग्राहक आ कर छोटे ठाकुर मोहन से बोला। अरे भाई साहब आज तो पैसा देकर खाना खाया हूँ। लेकिन कल तो मुफ्त में मिलेगा। तब छोटे ठाकुर मोहन बोला मजाक कर रहे हो मेरे साथ। मेरे इस होटल में किसी भी प्रकार का मुफ्त में खाना नहीं मिलता है। कहीं और जाओ और ढूंढो कि कहाँ पर मुफ्त का खाना मिलता है।

बिना पैसों के भोजन

तभी वह ग्राहक फिर से बोला कि क्या आपने सुना नहीं है। पास ही के नए होटल वालो ने कल के दिन बिना पैसों के भोजन रखा है। तभी अचानक से छोटे ठाकुर मोहन चौंक जाता है।

और बोलता है क्या बात कर रहे हो। ऐसा कैसे हो सकता है। वह ग्राहक फिर बोला कि आप यह सब कुछ नहीं जानते हैं। बाकी के खड़े लोग भी कहने लगते हैं कि कल ही हमें उस नए होटल में जाना होगा। मुफ्त का स्वादिष्ट भोजन करने के लिए।

बहुत गुस्सा

उन्ही के बीच में से एक आदमी बोला वाह वाह बिना पैसों का खाना कोई छोड़ सकता है क्या? तो सभी बोलते हैं कि कल के लिए फिर से कसरत करते हैं। जिससे कल के खाने के लिए भूख भी बढ़ेगी। ऐसा बोल कर सभी वहां से चले जाते हैं।

सभी की बातें सुनकर छोटे ठाकुर मोहन अंदर से बहुत गुस्सा हो जाता है। और बोलता है कि ऐसे कैसे चलेगा वह होटल। ऐसा दिमाग चलाऊंगा कि सब कुछ बंद करवा दूंगा। मुँह छुपाने के लिए जगह भी नहीं मिलेगी।

किराने की दूकान

फिर अगले ही दिन सुबह छोटे ठाकुर मोहन अपने गांव के सबसे बड़े किराने की दूकान पर जाता है। जहाँ से उसके होटल का सारा सामन आता है। दुकान का मालिक भोलू, छोटे ठाकुर मोहनको देख कर प्रणाम करता है। और बोलता है आइए आइए ठाकुर साहब। आपने यहाँ आपने का कष्ट क्यों किया? में ही आपके होटल पर सारा सामान पहुंचा देता। हमारा छोटू तो पूरे दिन ऐसे ही बैठा रहता है, उसी से भिजवा देता।

छोटे ठाकुर मोहन बोला अरे भोलू भैया आपसे कुछ जरुरी काम था इसलिए आपकी दूकान पर आया हूँ। तब भोलू बोला बोलिये मालिक आप बोलिये तो सभी। आपका काम सर आँखों पर। आप तो हमारे दूकान के बड़े ग्राहक है। भोलू अपने दुकान के नौकर छोटू से बोलता है छोटू जा जाकर छोटे ठाकुर मोहन के लिए गजब का शरबत लेकर आजा।

व्यपार नहीं करने दूंगा

छोटे ठाकुर मोहन शरबत के लिए मना करते हुए बोला सुनो भोलू भैया। मेरे ही होटल के बगल में रमा ने होटल खोला है। लेकिन में उसको वहां पर किसी भी प्रकार का व्यपार नहीं करने दूंगा। अगर उसके होटल का कोई भी व्यक्ति तुम्हारे यहाँ कुछ भी सामान लेने आता है।

तो उसको अपनी दूकान का सबसे खराब माल देना। समझ गए, जिससे लोग उस होटल का खाना खा कर थू थू करके जाये। में भी देखता हूँ कि वह कैसे अपना होटल चलते हैं। भोलू बोला ठीक है छोटे ठाकुर जैसा आप कहे वैसा ही में करूँगा।

एक पर्ची

और साथ में छोटे ठाकुर मोहन उसको एक पर्ची देकर कहता है इसमें मेरा सामान लिखा है। सारा सामान तैयार रखना। थोड़ी देर में मेरे होटल से कोई न कोई लेकर आ जायेगा। इतना सब कह कर छोटे ठाकुर मोहन वहां से चला जाता है।

लेकिन रामू काका दूकान के पास ही के एक पेड़ के पीछे छुप कर छोटे ठाकुर मोहन की सारी बातें सुन लेते है। रामू काका सोचते हैं कि ऐसी योजना बनाई है छोटे ठाकुर मोहन ने। ठीक है छोटे ठाकुर आप मुझे जानते नहीं हो। में आपको ऐसे ऐसे गोल गोल घुमाऊंगा। जिससे आपको कुछ समझ में भी नहीं आएगा।

सारा सामान

फिर रामू काका उस किराने की दुकान पर जाते हैं। और बोलते हैं कि सुनिए मुझे छोटे ठाकुर मोहन ने भेजा है। तब दूकान का मालिक भोलू छोटू से बोलता है। छोटू ठाकुर साहब का सारा सामान तैयार है तो लेकर आओ। वह सारा सामान लेकर रामू काका के हांथों में दे देता है।

रामू काका दूकान वाले से बोलते हैं कि छोटे ठाकुर मोहन ने बोला है कि इसका पैसा बाद में आकर दे दे देंगे। दूकान का मालिक भोलू बोलता है। ठीक है ठीक है इसकी कोई चिंता नहीं है। आप आराम से सामान ले जाइये। और ऐसे में रामू काका सामान लेकर वहां से चले जाते हैं।

होटल की शुरुआत

नए होटल पर सभी चीज की शुरुआत होती है। खाना बनने से लेकर ग्राहकों के आगमन तक। तभी छोटे ठाकुर मोहन उनके होटल की तरफ देख कर बोलता है। अरे नाचो नाचो सभी दिल खोल कर नाचो। खाना खा कर लोग थू थू करके जायेंगे, तब में नाचूंगा।

तभी अचानक से छोटे ठाकुर मोहन का नौकर आता है। और बोलता है छोटे मालिक बाहर आकर देखो क्या हो रहा है? गजब हो गया है। तब छोटे ठाकुर मोहन खूब खुश होता है और बोलता है तो मतलब वहां पर खेल शुरू हो चुका है। चलो देखते हैं वहां का नजारा केसा है।

होश उड़ जाते है

और जब छोटे ठाकुर मोहन अपने होटल से बाहर निकल कर रमा के होटल की तरफ देखता है। तब उसके होश उड़ जाते है। वह देखता है कि उसके होटल के आस पास काफी भीड़ है। और लोग भरी मात्रा में उसके होटल पर खाना खाने आ रहे है। और उसके होटल के खाने की तारीफ़ भी कर रहे हैं।

तभी उनके सभी लोगो के बीच में से एक व्यक्ति बोला। बहुत ही अच्छा खाना बना है। आओ आओ सभी आओ खाओ, बहुत ही अच्छा खाना बनाया है। इस होटल के खाने जैसा खाना कहीं और नहीं मिलेगा। और छोटे ठाकुर मोहन से बोलते हैं कि आओ आप भी आओ इनके होटल का खाना खाओ। तुम भी इस होटल का खाना खाओगे तो अपनी उँगलियाँ तक चाटोगे।

आश्चार्यचकित

ये सभी बातें सुनकर छोटे ठाकुर मोहन बहुत ही आश्चार्यचकित हो जाता है। और वहां से गुस्से से अपने होटल के अंदर चला जाता है। और अंदर जाकर बोलता है देख लूंगा सबको। मेरे साथ पन्गा लिया, अब में दिखता हूँ।
इसके बाद छोटे ठाकुर मोहन अपन दूकान के नौकर को बुला कर कहता है।

गांव के सबसे बड़े पेटू रोहन और सोहन को बुला करके लाओ। और उनसे कहना मुफ्त का खाना मिल रहा है। यह सुन कर वह इतना खाना खाएंगे कि होटल का सारा खाना ही खतम हो जायेगा। और पहले दिन ही सब लोगो के सामने इनकी नाक का जाएगी। बहुत ही मजा आएगा। जाओ जल्दी उन दोनों को बुला करके लाओ।

कान में सब कुछ बता देता है

यह सब सुन कर छोटे ठाकुर मोहन का नौकर सबसे पहले रामू काका के पास जाता है। और उनके कान में सब कुछ बता देता है। सारी बातें सुनने के बाद रामू काका उस नौकर से बोलते है। ठीक है, जा जैसा तुझे बोला गया है। जाकर वैसा ही कर। और कुछ पैसे उसके हाँथ में देकर और हँसते हुए रामू काका वहां से चले जाते हैं।

 पेटू रोहन और सोहन

अब वहां पर छोटे ठाकुर मोहन उन दोनों पेटू रोहन और सोहन का इंतज़ार करता है। और बोलता है कि पता नहीं वह दोनों पेटू कहाँ रह गए। तभी वह दोनों उसके पास आ ही जाते है। और छोटे ठाकुर मोहन से बोलते हैं। अरे छोटे ठाकुर आपने हमें बुलाया और हम चले आये। सोहन बोलता है, अरे साहब सुबह से भूख लगी है। कुछ भी नहीं खाया हूँ। अभी मेने सिर्फ दो किलो आलू और पांच किलो चना खाया है।

और रोहन भी बोलता है कि मेने भी सिर्फ दो किलो मूली और चार किलो बताशे ही खाये हैं। और फिर भी बहुत जबरदस्त भूख लगी है हम दोनों को। छोटे ठाकुर मोहन बोलते है कि फिर तो फिर आप दोनों ज्यादा समय बर्बाद नहीं करो। और वहां उस नए होटल में जा कर खाना खा लो। तो ऐसे में रोहन बोलता है, सही कहा बहुत भूख लगी है।

दोनों का आदर के साथ स्वागत

इसके बाद दोनों रमा के होटल की तरफ चले जाते हैं। और वहां पर रमा सभी का स्वागत करके उनको खाने के लिए बैठाती है। और बोलती है, यह तो आपका अपना ही होटल है। एक बार यहाँ का खाना चख कर देखिये। एक बार आप यहाँ खा कर देखिये और कहीं पर कहने की इच्छा ही नहीं होगी। सभी खाना खा कर रमा और उसके खाने की तारीफ़ करते हैं।

तभी अचानक रोहन और सोहन उसके होटल में आ जाते है। और बोलते है, दीदी हम आ गए। हमें भी अपने होटल का स्वादिष्ट भोजन करवाओ। रमा उन दोनों का आदर के साथ स्वागत करती है और उनको बैठाती है। अब रमा इनको खाना परोसती है और वह दोनों भुक्खड़ों की तरह खाना शुरू करते हैं।

यह देख कर रमा घबरा जाती है। और सोचती है कि सत्यानाश हो, यह दोनों कहाँ से आये हुए है। इन लोगो ने जिस हिसाब से खाना खाया है। उस हिसाब से तो खाने का एक दाना भी नहीं बचा है।

एक ठेला

और उधर छोटे ठाकुर मोहन बहुत खुश होता है। और कहता है लगता है कि रोहन और सोहन ने अपना काम शुरू कर दिया है। चलो जा कर देखता हूँ। तभी अचानक रामू काका एक ठेला लेकर आते है। और बोलते है कि खाना पीना तो मस्त चल रहा है।

लेकिन खाना सिर्फ यहाँ पर खत्म नहीं होगा। स्पेशल लोगो के लिए स्पेशल खाना आया है। गरम गरम दम बिरयानी हाजिर है। यह सुन कर रोहन और सोहन के मुँह में पानी आ जाता है। और दोनों आपस में बोलते है कि चलो चख कर देखते हैं।

एक शर्त

रामू काका कहते हैं लेकिन इसमें एक शर्त है। यह दो हांड़ी की बिरयानी जिसने भी खाना शुरू किया। उसको पूरा खत्म करके ही उठना है और जिसने पूरा खत्म नहीं किया। उसको इस गांव को छोड़ कर भागना पड़ेगा। जिसमे भी हिम्मत है वह इतना खाना खा करके बताओ।

यह सब सुनकर रोहन और सोहन घबरा जाते है। और बोलते हैं कि इतनी बिरयानी खा कर मेरा पूरा पेट खराब हो जायेगा। अब हमें यहाँ से भाग लेना चाहिए। इसी में हम दोनों की भलाई है। तभी वहां खड़े छोटे ठाकुर मोहन गुस्से में बोलते हैं। अरे मेरी यह तरकीब भी बेकार हो गयी। और उधर रमा रामू काका का शुक्रिया करती है कि उन्होंने इस बड़ी परेशानी को टाल दिया।

हांड़ी में क्या है? 

उसके बाद छोटे ठाकुर मोहन ने रामू काका से पूछा कि उस हांड़ी में आखिर तुम क्या लेकर आये हो? तब रामू काका कहते हैं कि इसमें तो कुछ भी नहीं है। में बाजार से सिर्फ दो खली हाड़ियाँ लेकर आया हूँ। और हांड़ी के बगल में मेने कल की बासी बिरयानी लगा दी है।

तभी छोटे ठाकुर मोहन बोलते हैं, अरे तुम लोग तो सभी को बेवकूफ बना रहे हो। रामू काका कहते है क्या करें, आपने हमारे लिए खराब अनाज का आर्डर दे दिया था। जिससे लोग हमारे ऊपर ऊँगली उठाये। और में वही अनाज आपके नाम से उठा कर ले आया। और वो भी आपके नाम से उधारी करके।

रामू काका की योजनाएं

रोहन सोहन को भेज कर हमारे होटल का नुक्सान करने की कोशिश की। आपके ही उस नौकर ने मुझे समय समय पर खबर दी थी। और इसीलिए मेने यह सभी योजना बनाई। दिमाग सिर्फ आप ही के पास नहीं है, ठाकुर साहब। हमारे पास भी है।

गांव के लोग आपस में छोटे ठाकुर मोहन के इन बेकार योजनाओ के बारे में बातें करने लगे। और बोलते है कि जो दुसरो के लिए गड्ढा खोदता है वह खुद ही उसी में गिर जाता है। और सभी फैसला करते हैं कि आज से रमा के होटल में ही खाना खाया करेंगे।

यह सब सुनकर रमा बहुत ही खुश होती है। और रामू काका से कहती है, आप सुन रहे हो । सभी लोह क्या बोल रहे है? रामू काका बोले मेने तुमसे पहले ही कहा था। अपना यह होटल चलेगा नहीं बल्कि दौड़ेगा। रमा बोलती है “जाको रखे साइयाँ, मार सके न कोय”. और इस शानदार कहानी का अंत यहीं होता है।

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