चीन का मंगल ग्रह पर जाने का राज़ क्या है?

चीन का मंगल ग्रह पर जाने का राज़ क्या है? क्यों चीन मंगल ग्रह पर जाना चाहता है?

चीन का ताइवान 1 मार्स मिशन, आज के दुनिया में तो मंगल ग्रह पर जाने की तो जैसे रेस शुरू हो चुकी है। हर बड़ा देश मंगल ग्रह की स्टडी करने की कोशिश कर रहा है। और यहाँ पर आने अंतरिक्ष यान भी भेज रहा है।

चीन के चायनीस स्पेस एजेंसी का ताइवान 1 मिशन भी इनमे से एक है। आज के इस आर्टिकल में हम इस मिशन के पीछे की इतिहास की बातें साझा करेंगे। और जानेंगे इसकी लॉन्चिंग के बारे में। ताइवान 1 मिशन, के पीछे चीन का मकसद क्या है और यह मंगल ग्रह पर कब उतरेगा?

वैसे क्या आप ताइवान 1 के बारे में जानते हैं क्या? अगर नहीं जानते तो आज के आर्टिकल को शुरुवात से पूरा पढ़िए, काफी कुछ जानने को मिलेगा आप सभी को। ताइवान 1, चायनीस स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन का एक ग्रहों के बीच का मिशन है। जिसके तहत चीन ने मंगल ग्रह की ओर एक रोबोटिक अंतरिक्ष यान भेजा है। इस रोबोटिक अंतरिक्ष यान के अंदर ऑर्बिटर, रोवर और लैंडर मौजूद हैं।

ताइवान 1 का मतलब

ताइवान 1 का मतलब होता है, स्वर्ग के सत्यो की खोज। ताइवान 1 अंतरिक्ष यान कुछ चीन के हैनान वेनचांग, 23 जुलाई 2020 को स्पेस में भेजा गया था। इसके लिए लॉन्ग मार्च 5 नाम के एक हैवी लिफ्ट लांच व्हीकल इस्तेमाल किया गया था। जो धरती की भूस्थिर कक्षा तक 14000 किलोग्राम का वजन लेकर जा सकता है।

यह राकेट मंगल ग्रह पर जाने वाला सबसे भारी अंतरिक्ष यान में से एक है। इसका कुल वजन करीब 5000 किलोग्राम का है। क्या आपको पता है कि पहले चीन यह मिशन रूस के साथ पार्टनरशिप में करना चाहता था। और इसके लिए दोनों देश तैयार भी थे। नवंबर 2011 में रूस ने दक्षिणी कजाखस्तान में स्तिथ भिकनूर कोस्मोड्रोम लॉन्चिंग साइट से फोबोस ग्रंट नाम का अपना अंतरिक्ष यान लांच किया।

इस अंतरिक्ष यान का मकसद मंगल और उसका चाँद फोबोस की सैर करना था। इसी अंतरिक्ष यान के साथ चीन का यिंगवु वन अंतरिक्ष यान जोड़ा गया था। और यह चीन का पहला मार्स सर्वाइवल बनने वाला था। लेकिन रूस के फोबोस ग्रंट नाम का अपना अंतरिक्ष यान जितनी तेज़ी से ऊपर गया, तो उतनी ही तेज़ी से निचे भी आ गया मतलब उनका यह मिशन मंगल ग्रह तो दूर, धरती के बहार भी नहीं पहुँच पाया था।

अकेले ही करने का एलान

साल 2016 में, चीन ने मंगल ग्रह को अकेले ही करने का एलान कर दिया और सिर्फ 5 साल बाद ताइवान 1 मार्स मिशन को लांच कर दिया गया। अब हम जानते हैं कि चीन इस मिशन के द्वारा क्या प्राप्त चाहता है?

यह चीन का पहला ग्रहों के बीच का मिशन है और इसके द्वारा वह अपने ऑर्बिटर को मंगल ग्रह के कक्षा में घुसने और फिर अपने रोवर को मानल गृह के सतह पर उतारना चाहता है। अगर यह ऐसा करने में कामियाब हो जाते हैं, तो अमेरिका और सोवियत यूनियन के बाद मंगल ग्रह के सतह पर उतरने वाले दुनिया के तीसरे देश बन जायेंगे। जो अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।

अंतरिक्ष यान में कुल 13 वैज्ञानिक उपकरण भेजे गए हैं। जिनमे हाई रेसोलुशन कैमरा, मार्स मैगनेटोमीटर, स्पेक्ट्रोमीटर, ऑर्बिटर सबुरफेस रडार, पार्टिकल एनालाइजर, ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार, मल्टी स्पेक्ट्रम कैमरा, मार्स सरफेस कंपाउंड डिटेक्टर ओ मार्स मेजरमेंट इंस्ट्रूमेंट है। इन सभी उपकरणों के जरिये वह कुल पांच वैज्ञानिक लक्ष्य को पूरी करना चाहते हैं। जो कि कुछ इस प्रकार हैं –

नंबर 1

मंगल ग्रह के सतह की संरचना कैसी है और वो कैसे विकसित हुआ था? ज्वालामुखी, उस पर मौजूद ग्लेशियर, इन सभी चीज़ों के बारे में जानकारी चाहते हैं।

नंबर 2

मंगल ग्रह के सतह के अंदर भूमिगत परत कौनसी है? और क्या वहां पर पानी हो सकता है? इसके लिए ऑर्बिटर और रोवर में राडार लगायी गयी है।

नंबर 3

मंगल ग्रह की सतह पर कौन कौन से पत्थर, खनिज पदार्थ और तत्व मौजूद हैं? जिन जगहों पर प्राचीन झीलों की बात कही जाती है, वहां पर कौन से खनिज पदार्थ पाए जाते हैं? और क्या वह प्राचीन समय में वहां पर पानी होने के सबूत पेश करते हैं? यह काम करेंगे स्पेक्ट्रोमीटर।

नंबर 4

मंगल ग्रह के जलवायु, वहां के मौसम, वातावरण और योण क्षेत्र का अध्ययन। इसके लिए पार्टिकल डिटेक्टर भेजे गए हैं।

नंबर 5

मंगल ग्रह के आंतरिक ढांचे का अध्ययन करना, वहां की चुंबकीय क्षेत्र और गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के बारे में जानना। यह काम करेंगे मैग्नेटोमीटर और राडर्स।

इस तरह वह इस मिशन के द्वारा न सिर्फ मंगल ग्रह के वर्तमान रूपको अध्ययन करना चाहते है, बल्कि अतीत में उसके अस्तित्व के बारे में गहराई से जानना चाहते है। चीन ने साल 2030 के दसक में मार्स सैंपल रिटर्न की तैयारी भी की है। जो मंगल ग्रह के सतह से चुने हुए नमूने को वापस धरती पर लाएगा।

और यह नमूने चुनेगा कौन? यह नमूने भी ताइवान 1 मिशन के दौरान चुने जायेंगे। जुलाई 2020 में मंगल ग्रह के तीन और मिशन भेजे गए थे। नासा का मंगल ग्रह मिशन 2020, यूएई का मिशन और सीएनएसए का ताइवान 1 । मंगल ग्रह पर भेजे गए थे। और यह तीनो मंगल ग्रह पर पहुँच चुके हैं।

ताइवान 1 का सफर 

23 जुलाई 2020 को लांच हुए ताइवान 1, अंतरिक्ष यान करीब 7 महीने के सफर के बाद 10 फरवरी 2021 को मार्क्स के कक्षा में जा चुका है। इसको मंगल ग्रह के गुरुत्वीय खिंचाव में जाने के लिए इसके इंजन को जलाया गया था। जिससे कि इसकी रफ़्तार कम हो जाये।

अब इसका ऑर्बिटर अगले कुछ महीनो एक ऐसे ही मंगल ग्रह को ऑर्बिट करता रहेगा और मई या फिर जून तक यह लैंडर को मंगल ग्रह के सतह पर भेजेंगे। इस दौरान यह अपनी उतरने वाली जगह को स्कैन करेगा और उसे अच्छे से जाँच करेगा। इससे वह वहां पर उतरने के लिए सबसे सही जगह ढूंढ लेगा और धरती पर बैठे वैज्ञानिकों की टीम उसे उस लोकेशन पर उतारने की तैयारी करेगी।

यूटोपिया पेनेसिया क्या है?

वैसे क्या आप जानते हैं, कि ताइवान 1 लैंडर की उतरने वाली जगह कौन सी होने वाली है ? यह है यूटोपिया पेनेसिया, यूटोपिया मंगल ग्रह पर स्तिथ इम्पैक्ट बेसिन है, जो 3300 किलोमीटर डाईमीटर का है। मंगल ग्रह ही नहीं बल्कि पूरे सौर मंडल का सबसे बड़ा इम्पैक्ट बेसिन है। यूटोपिया पेनेसिया यहीं के एक समतल सतह को कहते हैं। यूटोपिया पेनेसिया का मतलब होता है स्वर्ग की जमीन।

3 सितम्बर 1976 को नासा का वाइकिंग 2 लैंडर भी यहीं उतरा था। साल 2016 में नासा ने यहाँ पर ज़मीन के निचे बर्फ और बहुत ज्यादा मात्रा में पानी होने की संभावनाएं जताई थी।

और यही कारण यह कि चीन भी इसी जगहों को छान-बीन और अध्ययन करना चाहती है। इस पूरे मिशन की अवधि लगभग 220 दिन 2 घंटे 54 मिनट रखी गयी है। इसका ऑर्बिटर मंगल ग्रह को ऑर्बिट करेगा और रोवर 90 सोल्स तक मंगल ग्रह पर घूमेगा।

सोल्स क्या होता है?

चलिए जानते हैं सोल्स क्या होता है? धरती और मंगल ग्रह के दिनों में अंतर होता है। हमारी धरती पर 1 दिन करीब 24 घंटों का होता है। लेकिन मंगल ग्रह धरती से थोड़ा धीरे घूमता है और यही कारण है कि इसको सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में 24 घंटे और 40 मिनट का समय लगता है। मंगल ग्रह के इसी एक दिन को हम सोल कहते हैं।

वैसे क्या आप जानते हैं कि चीन के अलावा कुछ दूसरे देशों ने भी इस मिशन में अपना योगदान दिया है। अर्जेंटीना की नेशनल स्पेस एजेंसी, कॉमिसियोन नेशनल डे एक्टिविएड्स एस्पेशियलस वहां के ट्रैकिंग स्टेशन लगाने में चीन की मदद की है। इस ट्रैकिंग स्टेशन ने साल 2019 में चीन के एक अंतरिक्षयान को चाँद पर उतरने में भी काफी मदद की थी।

चीन की मदद

फ्रांस के इंस्टिट्यूट फॉर रिसर्च इन एस्ट्रो फिजिक्स एंड प्लनेटोलोजी ने स्पेक्ट्रोमीटर इंस्ट्रूमेंट को दे कर चीन की मदद की। और ऑस्ट्रिया की ऑस्ट्रिन रिसर्च प्रमोशन एजेंसी ने मैग्नेटोमीटर को बनाने में चीन की मदद की थी।

तो यह था चीन का ताइवान 1 मिशन, मैं आशा करता हूँ कि उनका यह मिशन सफल हो और वह अपने सभी लक्ष्यों को पूरा करें। क्यंकि अंतरिक्ष की खोज में देश या सरहद नहीं बल्कि इंसान काम करते हैं। और एक देश की सफलता पूरी इंसानियत की कामियाबी होती है। मई या जून में चीन जब अपने इस मिशन को पूरा करेगा, तो हम इसकी सफलता के बारे में आपके लिए के आर्टिकल जरूर लाएंगे।


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