ब्रह्माण्ड की सबसे गर्म और ठंडी चीज क्या है?

ब्रह्माण्ड की सबसे गर्म और ठंडी चीज क्या है?

अगर आपसे पूछा जाए कि दुनिया में सबसे ज्यादा गर्म और सबसे ज्यादा ठंडी चीज़ क्या है? तो आपका जवाब क्या होगा? शायद आपका जवाब आग और बर्फ होगा। आज के इस आर्टिकल में, हम आप सभी को बताएंगे, तापमान पैमाने की वह सच्चाई जिसको जानने के बाद आप काफी आश्चर्यचकित रहे जायेंगे।

अगर हम आपसे बोले कि सूर्य से कही हजार गुना तापमान तो हमने अपने पृथ्वी पर ही नापा है। तो क्या आप हमारी बात पर विश्वास करेंगे? तो चलिए जानते हैं ब्रह्माण्ड की सबसे गर्म चीज़ के बारे में।

ब्रह्माण्ड की सबसे गर्म क्या है?

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि 0 डिग्री सेल्सियस वह तापमान है। जिसपर पानी जम कर बर्फ का रूप ले लेता है। और इस तापमान पर तो हमारी खैर नहीं। इससे थोड़ा ऊपर 36 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सॉफ्ट सॉफ्ट बटर पिछलने लगता है। इस भी थोड़ा ज्यादा 37 डिग्री सेल्सियस तापमान आम इंसान का होता है।

पृथ्वी के सतह का अब तक का रिकॉर्ड किया गया। दिन के समय का उच्चतम तापमान 71 उच्चतम डिग्री सेल्सियस है। जिसको 2005 में रिकॉर्ड किया गया था। इसे अधिक 100 डिग्री सेल्सियस तापमान पर तो हम जानते हैं कि पानी तरल फॉर्म से गैस के फॉर्म यानि भाप में बदलने लगता है। इससे अधिक तापमान वह है, जहाँ तक कोई जिन्दा प्रजाति जीवित रह पायी है, और वह है 151 डिग्री सेल्सियस। आपको बता टार्डिग्रेड जानवर, में रहने वाला आठ टांगो वाला सूक्ष्म जीव है। जिसने यह तापमान सहन किया था।

ग्रहों के गर्म तापमान

तारा अगर और ज्यादा बढे, तो हमे बुध ग्रह के समय का तापमान मिलता है। जो कि 427 डिग्री सेल्सियस है। इससे थोड़ा अधिक जाये तो हमे शुक्र ग्रह का ज्यादा से ज्यादा सतह का तापमान। जो कि 462 डिग्री सेल्सियस है।

आपको बता दें कि शुक्र ग्रह हमारे सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह है। क्या आपको पता है शुक्र ग्रह से ज्यादा तापमान किस चीज़ का है? शुक्र ग्रह से ज्यादा तापमान, जब फार्मूला 1 की कार का ब्रेक लगाई जाती है, तब इससे 750 डिग्री सेल्सियस का तापमान पैदा होता है।

अब क्या आप जानना चाहते हो कि अगर कहीं पर आग लगती है तो उसका ज्यादा से ज्यादा तापमान कितना पहुंच सकता है? अगर कहीं पर आग लगती है तो उसका ज्यादा से ज्यादा तापमान 1027 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है। इससे अधिक तापमान हमें ज्वालामुखी के लावा का मिलता है, जो कि 1200 डिग्री सेल्सियस है।

इससे थोड़ा सा और ऊपर जाएँ तो हमें वह तापमान मिलता है। जिसपर लोहा ठोस से तरल में बदलने लगता है। यानिकि लोहे का मेल्टिंग पॉइंट, जो 1538 डिग्री सेल्सियस है। तापमान को और बढ़कर 2861 डिग्री सेल्सियस तक पंहुचा दें। तो इस तापमान पर जो लोहा तरल रूप में बदला हुआ था, वह अब गैस में बदलने लगता है। मतलब यह तापमान लोहे है। मतलब यह तापमान लोहे का बोइलिंग पॉइंट है।

सूर्य का तापमान

अब चलते हैं अपने सूर्य की और, जिसके सतह का तापमान 5500 डिग्री सेल्सियस है। सूर्य के सतह से ज्यादा तापमान हमारी पृथ्वी की कोर का है, जो कि 6000 डिग्री सेल्सियस है। अब सबसे ज्यादा तापमान सूर्य के बाहरी वातावरण का, जो है दस लाख डिग्री सेल्सियस। अगर हम सूर्य के सतह से होते हुए इसकी कोर तक पहुंच जाएँ। तो हमें इसके कोर में जो तापमान मिलेगा, वह है एक करोड़ पचास लाख डिग्री सेल्सियस।

जब किसी तारे मे, सुपरनोवा विस्फोट होता है। तो हमे जो तापमान मिलता है, वह है पचपन करोड़ डिग्री सेल्सियस। जब हमारे ब्रह्माण्ड का बिग बैंग धमाके से जन्म हुआ था। उसके 100 सेकंड बाद इस ब्रह्माण्ड का तापमान एक अरब डिग्री सेल्सियस पंहुचा था।

इससे अधिक तापमान हमे मिलता है किसी भी नए बने न्यूट्रॉन स्टार का। जो है, 99,999,999,726 डिग्री सेल्सियस। अगर हम जाने कि इंसानो द्वारा पैदा किये गए अभी तक का सबसे ज्यादा तापमान तो, वह 55,000,000,000,000 डिग्री सेल्सियस है। यह तापमान वैज्ञानिकों ने स्विट्ज़रलैंड में मौजूद लार्ज हैड्रान कोलाइडर में हासिल किया था।

ब्रह्माण्ड का सबसे ज्यादा तापमान

चलिए अब चलते हैं, ब्रह्माण्ड के सबसे ज्यादा तापमान की ओर। वैसे वैज्ञानिकों का मानना है, कि इस ब्रह्माण्ड का जन्म बिग बैंग थ्योरी के द्वारा हुआ था। जिसमे सारा ब्रह्माण्ड एक छोटी सी बिंदु में समाहित था। और वैज्ञानिकों के अनुसार, इस ब्रह्माण्ड में अभी तक सबसे ज्यादा तापमान बिग बैंग से ठीक पहले उसी छोटे से बिंदु का था। वह तापमान कितना था, क्या आपको पता है? बिग बैंग से ठीक पहले उसी छोटे से बिंदु का तापमान 1,420,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000 डिग्री सेल्सियस था।

यह ब्रह्माण्ड का सबसे ज्यादा तापमान रहा है। वैज्ञानिक इस तापमान को अब्सोलुट हॉट बोलते हैं। अब्सोलुट हॉट का मतलब होता है, कि तापमान पैमाने पर इससे ज्यादा तापमान मौजूद नहीं है। अगर इससे ज्यादा तापमान होगा तो, वह भौतिकी के सारे नियम को तोड़ देगा।

यह तो हमने जाना, ब्रह्माण्ड की सबसे गर्म चीज़ के बारे में। चलिए अब जानते हैं, ब्रह्माण्ड की सबसे ठंडी चीज़ के बारे में।

ब्रह्माण्ड की सबसे ठंडी चीज क्या है?

जैसा कि हम जानते हैं कि 0 डिग्री सेल्सियस पर पानी जम कर बर्फ में परिवर्तित हो जाता है। हालाँकि इस तापमान पर हमे ठण्ड महसूस होती है, लेकिन फिर भी यह तापमान बहुत ज्यादा गर्म है। अगर इससे निचे जाएँ, तो हमे मिलता है भारत में अब तक का सबसे कम रिकार्डेड तापमान। जो कि -45 डिग्री सेल्सियस है। जिसे कश्मीर में रिकॉर्ड किया गया था। और आज तक का पृथ्वी का सबसे कम रिकार्डेड तापमान है, -89 डिग्री सेल्सियस। जिसे 21 जुलाई 1983 में अंटार्टिका में रिकॉर्ड किया गया था।

इससे कम मंगल ग्रह का तापमान है। जिसका रात के समय -125 डिग्री सेल्सियस तापमान पहुँच जाता है। इससे कम तापमान हमारे चन्द्रमा का है। जब चंद पर रात होती है, तब उस समय इसका तापमान -173 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। अब आप सोच रहे होंगे कि मंगल ग्रह चाँद के अपेक्षा सूर्य इ बहुत ज्यादा दूर है। तो चाँद, मंगल ग्रह के जितना ठंडा क्यों? तो कारण है चन्द्रमा पर किसी भी प्रकार का वातावरण नहीं है, जो कि गर्मी को सोख ले।

ब्रह्माण्ड का सबसे कम तापमान

इससे कम -196 डिग्री सेल्सियस तापमान पर नाइट्रोजन गैस, गैसीय रूप से तरल रूप में बदलने लगती है। इससे थोड़ा और निचे -210 डिग्री सेल्सियस पर नाइट्रोजन गैस जम जाती है। किसी समय में प्लूटो हमारे सौरमंडल के ग्रहों के सूचि में शामिल था। जिसका तापमान -229 डिग्री सेल्सियस है।

इससे कम -253 डिग्री सेल्सियस पर हाइड्रोजन गैस, गैसीय रूप से तरल रूप में परिवर्तित होने लगती है। और -259 डिग्री सेल्सियस पर हाइड्रोजन पूरी तरह से जम जाता है। इससे और निचे जाने पर -269 डिग्री सेल्सियस पर हीलियम गैस तरल रूप में बदलने लगता है। इससे कम हमारे ब्रह्माण्ड का औसत तापमान मिलता है, जो कि -270 डिग्री सेल्सियस है। इससे कम -272.2 डिग्री सेल्सियस पर हीलियम गैस पूरी तरह जम जाती है। अब चलते हैं इससे भी कम तापमान पर, जो खुद पृथ्वी पर ही रिकॉर्ड किया गया था। प्राकृतिक रूप से नहीं कृत्रिम रूप से।

इंसान द्वारा निर्मित सबसे कम तापमान

दरअसल इटैलियन इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने इस तापमान को अपने लैब में हासिल किया था। जो -273.14 डिग्री सेल्सियस था। अब चलते हैं ब्रह्माण्ड की सबसे ठंडी चीज़ की ओर और वह ब्लैक होल है। भौतिकी के नियमों के अनुसार किसी परमाणु में मौजूद कण के कंपन बंद हो जाये। तो ऐसी स्तिथि मे, कोई भी गर्मी नहीं रहती। वास्तव में ऐसा हो पाना असंभव है। लेकिन सैद्धांतिक रूप से, वैज्ञानिक मानते हैं कि ब्लैक होल की कोर में पदार्थ इतना सघन होता है। कि वहां छोटे कणो के कम्पन रुक जाते हैं। इस वजह से ब्लैक होल का तापमान -273.144 डिग्री सेल्सियस माना जाता है।

आपको बता दें -273.15 डिग्री सेल्सियस तापमान को परम शुन्य तापमान बोला जाता है। जो कि केल्विन पैमाने पर 0 केल्विन होता है। और इससे निचे तापमान कभी नहीं जा सकता। अगर ऐसा होता है तो भौतिकी के नियम टूट जायेंगे।


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