ब्रह्माण्ड की सबसे बुद्धिमान सभ्यता कौन सी है?

ब्रह्माण्ड की सबसे बुद्धिमान सभ्यता

आज हम चाँद और मंगल ग्रह पर पहुँच चुके हैं। हमने ब्रह्माण्ड की गहराईयों में छुपी आकाशगंगा को भी खोज निकला है। आज हमारे अंतरिक्षयान सौरमंडल की सीमाओं को पार कर तारे के बीच का पहुंच चुके हैं।

लेकिन हमारे इतने विकसित होने के बावजूद भी हमारे मन में कुछ सवाल अपना घर बनाए बैठे हैं। जिनका जवाब हम आज भी ढूंढ रहे हैं। क्या हम इस ब्रह्माण्ड में अकेले हैं? क्या इस ब्रह्माण्ड में कहीं हम जैसे ही कोई बुद्धिमान एलियन सभ्यता मौजूद है? आखिर कहाँ हैं इस ब्रह्माण्ड के सारे बुद्धि जीव? आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे ऐसे ही सभी सवालों के जवाब।

ब्रह्माण्ड उत्पत्ति कैसे हुई?

आज से 13.7 बिलियन साल पहले हमारा सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड एक छोटी से बिंदु के समाहित था। उस समय, समय का कोई भी अस्तित्व नहीं था। फिर होता है, उस छोटी सी बिंदु में महाविस्फोट। जिसे हम बिग बैंग के नाम से जानते हैं। उस महाविस्फोट से ही एक चीज़ अस्तित्व में आयी। जिसे इंसान आज तक नहीं समझ पाया और वह है समय।

बिग बैंग धमाके से ब्रह्माण्ड के जन्म के साथ ही समय की शुरुवात होती है। जिसे समय की शुरुआत बोलते हैं। समय की शुरुवात के तीन मिनट के बाद ब्रह्माण्ड में पहला परमाणु बनता है। ब्रह्माण्ड के जन्म के 180 मिलियन साल बाद परमाणु एक बड़े क्षेत्र में ढहने लगता है। और जन्म होता है ब्रह्माण्ड में पहले तारे का।.

तारों का जन्म कैसे हुआ?

समय के चलते ब्रह्माण्ड में नए नए तारे जन्म लेते रहे। और छोटी छोटी आकाशगंगा बनती गयी। धीरे धीरे छोटी छोटी आकाशगंगा आपस में मिलने लगी और बड़ी आकाशगंगा बनने लगी। ब्रह्माण्ड के जन्म के एक बिलियन साल बाद, बड़ी आकाशगंगा के बेच में अत्यधिक द्रव्यमान वाला ब्लैक होल बनने लगा।

ब्रह्माण्ड के जन्म से लेकर 9 बिलियन सालों तक ब्रह्माण्ड में असंख्य तारे जन्म ले चुके थे। और बूढ़े हो कर मर भी चुके थे। जिनमे से कई तारे तो ऐसे रहे होंगे जिनके ग्रहों पर जीवन फला फूला भी होगा। और वह विकसित होकर खत्म भी हो चूका होगा।

लेकिन में रोजाना नए तारे जन्म ले रहे हैं। अभी तक सूर्य का जन्म भी नहीं हुआ था। लेकिन बिग बैंग के 9.2 बिलियन साल बाद, यानी कि अभी से साढ़े चार मिलियन साल पहले। एक नाब्युला से जन्म होता है, हमारे सौरमंडल का। जिसमे हमारा सूर्य जन्म लेता है और इसी के साथ जन्म लेते हैं, हमारी पृथ्वी सहित अन्य ग्रह।

चन्द्रमा का जन्म कैसे हुआ?

पृथ्वी के जन्म के बाद हमारी बेबी एअर्थ से मंगल ग्रह के आकार का कोई पिंड टकराता है। उस टक्कर की वजह से पृथ्वी से काफी मालवा अंतरिक्ष में चला जाता है। जो पृथ्वी के चारों और एक रिंग के आकार में घूमने लगता है। धीरे धीरे उस रिंग का द्रव्य आपस में जुड़ने लगता है। जिससे जन्म होता है, हमारे चन्द्रमा का। धीरे धीरे पृथ्वी ठंडी होती है और उस पर ठोस जमीन बनने लगती है। पृथ्वी पर लाखों सालों तक कॉमेट और एस्ट्रोइड की बारिश होती रहती है। और कमेंट्स अपने साथ पानी लाते रहे।

शुरू में पृथ्वी पर वायुमंडल नहीं था। लेकिन बाद में पृथ्वी पर पिघले हुए पदार्थों और फटते हुए ज्वालामुखी से पानी की वास्प, कार्बन डाई ऑक्साइड, मीथेन और अमोनियम गैसें निकली। जिससे पृथ्वी का शुरुवाती वायुमंडल बना। लेकिन अभी भी पृथ्वी पर जीवन देने वाली गैस ऑक्सीजन नहीं थी।

लेकिन सूर्य से आने वाली किरणों ने पानी के साथ प्रतिक्रिया करके उसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ दिया। इन सभी घटनाओ के बाद पृथ्वी पर घटती है एक अनोखी घटना। वह थी पृथ्वी पर जीवन की शुरुवात। पृथ्वी धीरे धीरे ठंडी हुए तो भाप के संघनन की वजह से इस पर बहुत तेज़ वर्षा शुरू हो गयी। और बरसते बरसते इसने महासागरों को भर दिया।

जीवन की शुरुवात

पृथ्वी पर धीरे धीरे आदर्श स्तिथियाँ बनने लगी। और समुद्रों में कार्बन के जटिल अणुओ से जीवन की शुरुवात होने लगी। जीवन अपना जटिल रूप धारण करने लगा और अपने आप को विकसित करने लगा।

पृथ्वी के वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ने लगी। साथ ही ओजोन का भी निर्माण होने लगा। जीवन अपने आप को विकसित करते हुए, समुद्रों से बाहर आया। और अलग अलग प्रजातियों में विकसित होने लगा। जिनमे से विशालकाय डायनासौरों का भी विकास हुआ। फिर आयी एक महा प्रलय, जिसमे डायनासौरों का अंत हुआ और पृथ्वी पर जीवन, एक बार फिर से अलग अलग प्रजातियों में विकसित होने लगा। इस बार विकास करने की बारी थी, मैमल्स की। मैमल्स से विकसित होते हुए आज हम इंसान बने। इस ग्रह की सबसे बुद्धिमान प्रजाति।

आज हम अपनी बुद्धिमता के दम पर चाँद और मंगल पर पहुंच चुके हैं। लेकिन अभी भी हम एक ऐसे सवाल के उत्तर की खोज में है। जिसका जवाब हमे आज तक नहीं मिला। और आज भी उस सवाल का जवाब ढूंढने में हमारी खोज जारी है। और वह सवाल है कि क्या इस ब्रह्माण्ड में हम अकेले हैं? या हम जैसी ही कोई एलियन सभ्यता इस ब्रह्माण्ड में कहीं मौजूद है?

आखिर कहाँ है

अगर इस ब्रह्माण्ड में हम जैसे कोई दूसरी सभ्यता है। तो वह अब तक हमसे क्यों नहीं मिले? आखिर कहाँ है, ब्रह्माण्ड में मौजूद एलियन? और क्या हमारे सौरमंडल में पृथ्वी के अलावा कोई और ऐसा ग्रह रहा है, जिसपर कभी जीवन फला फूला हो?

जैसा की हम जानते हैं कि हमारे सौरमंडल के जन्म के शुरुवाती दौर में जब ग्रह जन्म ले रहे थे। तब यह अपनी शुरुवाती दौर में काफी गर्म थी। और लाखों सालों तक यह ग्रह ठन्डे होते रहे। उसी दौर में पृथ्वी की ही तरह मंगल ग्रह भी ठंडा हो रहा था। लेकिन पृथ्वी की अपेक्षा मंगल ग्रह पर आदर्श परिस्तिथियाँ पहले बनी। कारण था कि मंगल ग्रह, पृथ्वी के अपेक्षा सूर्य से दूर है और पृथ्वी से छोटा।

जहाँ सौरमंडल के बनने के 30 करोड़ साल बाद भी पृथ्वी एक भट्टी की तरह धधक रही थी। वही मंगल ग्रह पर उस समय आदर्श परिस्तिथियाँ बन चुकी थी। ध्यान दें, आदर्श परिस्तिथि का मतलब पानी का तरल रूप में होना। जीवन के पनापने के लिए आदर्श परिस्तिथि, वो होती है। जहाँ पानी न तो गैस के फॉर्म में हो और न ही बर्फ की तरह जमी हुई अवस्था में हो।

मंगल ग्रह पर पानी के सागर और नदियां

जब पृथ्वी एक भट्टी की तरह धधक रही थी। तब मंगल ग्रह पर पानी तरल रूप में आप चुका था। मंगल ग्रह पर किये गए, मिशनों से पता चला है कि इसकी सतह पर पानी के सागर और नदियां हुआ करती थी। वैज्ञानिक मानते हैं कि मंगल के सागरों में छोटे छोटे बैक्टीरिया जन्म लेने लगे होंगे।

मंगल ग्रह पर जीवन पनप ही रहा था और जटिल बनने की ओर बढ़ रहा था। लेकिन तभी मंगल ग्रह से एक एस्ट्रोइड टकराया। जिसने मंगल ग्रह के उत्तरी भाग को पूरी तरह से खत्म कर दिया। एस्ट्रोइड के इस टक्कर के बाद मंगल पर पनप रहा जीवन खत्म हो गया।

जब पृथ्वी पर चाँद का जन्म हुआ था। उस समय मंगल पर जीवन जन्म ले कर खत्म हो चुका था। 2004 में नासा के रोवर्स ने मंगल की तस्वीरें ली, जिनमे गोल पत्थरों को देखा जा सकता है। आपको बता दें. कि ऐसे गोल पत्थर हजारों सालों तक पानी के बहने से बनते हैं। जो सबूत है कि मंगल ग्रह पर नदियां बहा करती थी। साथ ही मंगल की तस्वीरें में दर्रों और नदियों की संरचनाओं को भी देखा जा सकता है। मंगल पर उस एस्ट्रोइड के टकराने के बाद फिर से परिस्तिथियाँ आदर्श होने लगी और इस पर जीवन फिर से पनपने लगा।

मंगल पर परिस्तिथियाँ आदर्श तो बनी लेकिन धीरे धीरे वहां का वातावरण फिरसे बेकाबू होने लगा था। क्यूंकि मंगल का सूर्य से ज्यादा दूर होने की वजह से वहां पानी जमने लगा और वर्षा चक्र खत्म होने लगा। मंगल ग्रह पर इन बदलाव के वजह से वहां पर जीवन जटिल होने से पहले ही एक बार फिरसे खत्म होने लगा।

यूरोपा पर एलियन लाइफ

मंगल ग्रह पर जीवन को जटिल होने के लिए इतना समय ही नहीं मिला। जिससे वह पृथ्वी की तरह विकसित हो पाता। लेकिन जब मंगल ग्रह पूरी तरह से जम गया। उसके बाद पृथ्वी पर परिस्तिथियाँ आदर्श होने लगी थी। हमारा ग्रह सूर्य से न तो ज्यादा दूर है और न ही ज्यादा पास। पृथ्वी के गोल्डीलॉक ज़ोन में होने की वजह से इस पर परिस्तिथियाँ आदर्श बन कर रहे गयी।

आज हम पृथ्वी के बाहर दूसरे ग्रहों पर जीवन खोज रहे हैं। लेकिन हमे आज तक परग्रही जीवों के कोई भी सबूत नहीं मिले। लेकिन वैज्ञानिक अनुमान लगते हैं कि हमारे वायुमंडल के जुपिटर के चाँद पर यूरोपा पर एलियन लाइफ हो सकती है। कारण है कि यूरोपा पर बर्फ की इक्कीस किलोमीटर की एक मोती चादर मौजूद है। और जमी हुई बर्फ के नीचे पानी तरल रूप में मौजूद है। वैज्ञानिक मानते हैं कि यूरोपा पर बर्फ के नीचे मौजूद पानी में जीवन पनप रहा होगा।

वैज्ञानिक यह भी अनुमान लगते हैं कि वहां पर कोई भी बैक्टीरिया के रूप में नहीं बल्कि विशालकाय समुद्री जीवों के रूप में होगा। क्यूंकि यूरोपा पर जीवन विकसित होने में इतना समय तो मिल ही चुका है। कि वह बैक्टीरिया से विकसित होता हुआ जटिल जीव बन चुका हो। वैज्ञानिक ऐसा अनुमान इसलिए लगाते हैं, क्यूंकि पृथ्वी पर भी बर्फ की मोटी चादर के नीचे मौजूद तरल पानी में विशालकाय जीव पाए जाते है।

हमारे सौरमंडल में मंगल ग्रह और जुपिटर के बीच मौजूद एस्ट्रोइड बेल्ट में एक ड्वार्फ प्लेनेट मौजूद है, जिसका नाम है सिरस। वैज्ञानिकों के अनुसार इस बोने ग्रह पर भी बर्फ की चादर मौजूद है। जिसके निचे पानी तरल रूप से मौजूद है। वैज्ञानिक अनुमान लगते हैं कि इस बोने ग्रह पर बर्फ के नीचे मौजूद तरल पानी में जीवन पनप रहा होगा।

आकाशगंगा में लगभग कितने ग्रह है?

अब सवाल यह है कि सौरमंडल में ही पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रहों पर भी जीवन के पनपने की संभावनाएं हैं। तो हम अभी तक एलियन सभ्यता से क्यों नहीं मिले? वैज्ञानिकों के अनुसार हमारी आकाशगंगा में ही लगभग 50 करोड़ ग्रह तो ऐसे हैं जो कि पृथ्वी की तरह ही रहने योग्य है। हमारी आकशगनागा की उम्र पृथ्वी के उम्र से लगभग तीन गुना ज्यादा है। तो ऐसी स्तिथि में कुछ ऐसे भी ग्रह रहे होंगे जिनपर पृथ्वी के जन्म लेने से पहले ही जीवन काफी आधुनिक हो चुका हो।

जब इतने कम समय में हम इतने आधुनिक हो चुके हैं, तो जिन ग्रहों पर एलियंस सभ्यता पृथ्वी के जन्म लेने से पहले ही विकसित हो चुकी थी। आज वह कितने आधुनिक हो चुके होंगे। इतने समय में तो वह लोग इतने एडवांस हो ही चुके होंगे कि वह अलग अलग ग्रहों पर यात्रा कर पाएं। और दूसरी एलियन सभ्यताओं को खोज पाएं। जिस तरह से हम अपनी टेक्नोलॉजी से दूसरी एलियन सभ्यताओं को खोजने की कोशिश कर रहे हैं। तो जो सभ्यता हमसे अरबों साल पहले ही विकसित हो चुकी होगी, तो उनकी टेक्नोलॉजी आज कितनी एडवांस होगी।

लेकिन अब सवाल यह है कि अगर ऐसी कोई सभ्यता है, तो आज तक उन्होंने हमे क्यों नहीं ढूढ़ा? और क्यों हम आज भी अकेले हैं? हम यह जाने कि क्यों अकेले हैं तो उससे पहले जान लेते हैं कि जो सभ्यता हमसे अरबों साल पहले ही विकसित हो चुकी होगी। तो आज उनकी टेक्नोलॉजी कैसी होगी? वैज्ञानिक किसी भी सभ्यता को उनके विकास के आधार पर तीन भागों में बाँटते हैं। पहले प्रकार की सभ्यता, दूसरे प्रकार की सभ्यता और तीसरे प्रकार की सभ्यता।

पहले प्रकार की सभ्यता

वो होती है जो अपने ग्रह की सम्पूर्ण ऊर्जा को इस्तेमाल कर पाए। हम अभी इस स्तर में 0.73 नंबर पर हैं। और हम धीरे धीरे पहले प्रकार की सभ्यता बनने की ओर बढ़ रहे हैं। जिस दिन हम पृथ्वी पर मौजूद ऊर्जा के सारे श्रोतों को इस्तेमाल करने लग जायेंगे। उस दिन हम पहले प्रकार की सभ्यता बन जायेंगे। लेकिन हमे पहले प्रकार की सभ्यता बनने में करोड़ों सालों का वक़्त लगेगा।

दूसरे प्रकार की सभ्यता

जो सभ्यता अपने ग्रह के साथ साथ अपने तारे की सम्पूर्ण ऊर्जा को इस्तेमाल करने लगे। उसे दूसरे प्रकार की सभ्यता बोलते हैं। यह विज्ञान काल्पनिक जरूर लगता है लेकिन इस तरह की सभ्यता अपने तारे की चारो ओर डायसन क्षेत्र बना कर उसकी ऊर्जा को इस्तेमाल करती है।

वैज्ञानिकों ने हमसे 1470 प्रकाश वर्ष दूर एक तारा खोजा है। जिसे टैबी स्टार बोलते हैं, वैज्ञानिक ऐसा अनुमान लगते हैं कि इस तारे के चारो ओर एक डायसन क्षेत्र बना हुआ है।

तीसरे प्रकार की सभ्यता

यह वह सभ्यता होती है। जो अपने सम्पूर्ण आकाशगंगा की ऊर्जा को इस्तेमाल कर पाए। और पूरी आकाशगंगा को नियंत्रण कर पाए। जो सभ्यता हमसे अरबों साल पहले ही विकसित हो चुकी है, वह पहले प्रकार या दूसरे प्रकार की सभ्यता बन ही चुकी होंगी।

लेकिन आखिर वह सभ्यता हैं कहाँ? क्यों हम आज भी अकेले हैं? साल 1950 में यही सवाल एनरिको फर्मी ने भी उठाया था। जिसे हम फर्मी पैराडॉक्स के नाम से भी जानते हैं। तो चलिए जानते हैं कि

हम अभी तक एलियंस से क्यों नहीं मिल पाए?

पहला कारण

हो सकता है कि हमारी टेक्नोलॉजी इस काबिल ही नहीं हुई है। कि हम पर ग्राहियों से संपर्क कर पाएं।

दूसरा कारण

हो सकता है कि हमारे आस पास के किसी सौरमंडल में कोई एलियन सभ्यता हो, लेकिन वह बुद्धिमान न हो। जैसा कि हम जानते हैं कि हमारी पृथ्वी पर करोड़ो प्रजातियां हैं। अगर कोई भी बाहरी एलियन सभ्यता हमसे संपर्क बनाने की कोशिश करे। तो पृथ्वी पर मौजूद करोड़ो प्रजातियों में से केवल हम मनुष्य ही ऐसी एकलौती प्रजाति है एलियंस से सम्पर्क बनाने में सक्षम हैं।

हो सकता है कि हमने एलियंस की खोज में अभी तक जितने भी सिग्नल भेजे हैं। तो शायद उन ग्रहों पर बुद्धिमान सभ्यता मौजूद ही न हो। जो हमारे सिग्नल का जवाब दे पाए। क्या हो कि हमारे सिग्नल ऐसे ग्रहों पर पहुंचे हो, जहाँ केवल जानवर ही रहते हो। कोई बुद्ध जीव नहीं।

तीसरा कारण

हो सकता है कि हमारी पृथ्वी के जन्म से पहले ही कई बुद्धिमान सभ्यताएं विकसित हो चुकी हो। लेकिन उनके ग्रहों पर आये किसी प्रलय की वजह से वह खत्म हो गए हो। और जिन ग्रहों पर कभी जीवन फला फूला होगा, वह आज बंजर पड़े हो।

चौथा कारण

हो सकता है कि हम जैसे ही एलियन सभ्यता किसी दूसरी आकाशगंगा में हो। लेकिन ब्रह्माण्ड के फैलने की वजह से सभी आकाशगंगा एक दूसरे से दूर भाग रही है। हो सकता है कि हम उनसे कभी संपर्क ही न कर पाएं।

पांचवा कारण

हो सकता है कि कोई पहली या तीसरी सभ्यता हो। और वह हमको दूर से विकसित होते हुए देख भी रहे हो। और हम पर नजरें गढ़ायें हों। लेकिन हमारी टेक्नोलॉजी इस काबिल नहीं है कि हमे उनका पता चल पाए। और वह जान बुझ कर हमसे मिलना नहीं चाहते। क्यूंकि हमसे मिलकर उन्हें कोई भी फायदा नहीं होने वाला।

छठवा कारण

ग्रेट फ़िल्टर, यह थ्योरी काफी सटीक लगती है कि हम अभी तक परग्रहियों से क्यों नहीं मिल पाए? ग्रेट फ़िल्टर थ्योरी के अनुसार कोई सभ्यता कुछ हद तक ही विकास कर पाती है। उसके बाद वह सभ्यता पूरी तरह से खत्म हो जाती है। जो कि एडवांस सभ्यता होती है। जो पहली, दूसरी या तीसरी सभ्यता बनने की ओर अग्रसर होती है। वह या तो किसी प्राकृतिक आपदा की वजह से या मानव रचित आपदा यानि विश्व युद्ध लड़ कर खत्म हो जाते हैं। मतलब कोई भी सभ्यता ग्रेट फ़िल्टर को पार करके और ज्यादा एडवांस नहीं हो पाती।

आज हम इंसान पहली प्रकार की सभ्यता बनने की ओर बढ़ रहे हैं। हमने कुछ तरक्की क्या कर ली कि हम इतने बोखला गए कि हमने दो विश्व युद्ध भी लड़ लिए। आज भी हम इतने बोखलाए हुए हैं कि हम कभी भी तीसरा विश्व युद्ध भी लड़ सकते हैं। अगर तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो यह तो तय है की पृथ्वी से जीवन ही खत्म हो जायेगा। कारण होगा हमारे आधुनिक हथियार।

ग्रेट फ़िल्टर थ्योरी के अनुसार जो भी सभ्यता जितनी भी एडवांस होती जाती है। वह अपनी अंत की और उतनी ही अग्रसर होती जाती है। हो सकता है कि ग्रेट फ़िल्टर की वजह से ब्रह्माण्ड की विकसित सभ्यताएं नष्ट हो गयी हो। शायद इसी वजह हम अभी तक किसी भी एलियन सभ्यता से संपर्क नहीं कर पाए। यहाँ पर एक सवाल आता है कि अगर ग्रेट फ़िल्टर की वजह से कोई भी सभ्यता ज्यादा एडवांस नहीं हो पाती। तो क्या पृथ्वी पर भी कभी ग्रेट फ़िल्टर आया होगा? दरअसल अगर हम अतीत में झांक कर देखें, तो ऐसा लगता है कि हमारी पृथ्वी ग्रेट फ़िल्टर से गुजरी होगी। क्यूंकि हम अतीत में मौजूद सभ्यतों की छाप आज हजारों साल भी देख पाते हैं।

जैसे मिश्र की सभ्यता, आज भी मिश्र के पिरामिड्स हमारे लिए रहस्य बने हुए हैं। कि इतनी भारी भरकम पिरामिड्स को कैसे और क्यों बनाया गया था? अगर वो लोग इतने एडवांस थे, जिन्होंने इतने भारी भरकम पिरामिड बना दिए। तो इतनी आधुनिक सभ्यता आखिर कहाँ विलुप्त हो गयी। क्या वो लोग ग्रेट फ़िल्टर का शिकार हो गए?

सातवा कारण

जू हाईपोथीसिस, इस थ्योरी के अनुसार हम एलियन के एक्सपेरिमेंट का हिस्सा हैं। चलिए इसे एक उदहारण के रूप में समझते हैं। हम जू (चिड़ियाघर) में अलग अलग जानवरों को कैद करते हैं। हम उनके उत्तरजीविता के लिए सारे इंतज़ाम करते हैं। हम उनको केवल बाहर से ही विकसित होते हुए देखते हैं।

हम उनके बीच में नहीं जाते, जिससे उनको कोई अशांति न हो। हो सकता है कि एलियंस भी हमे अपने ग्रह से देख रहे हो कि हम कैसे अपने आपको विकसित करते हैं। हम कैसे अपने अस्तित्व की खोज करते हैं? हम कैसे उनसे मिले हैं जो हमपर एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं? हो सकता है कि कभी कभी वह हमारे बीच आते भी हो।

लेकिन उनकी टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस है कि हमे उनके आने का आभास ही न होता हो। लेकिन अब इस थ्योरी में, सवाल सामने आता है। कि अगर हम एलियन के एक्सपेरीमेंट का इससे हैं, तो वह हमसे कब मिलेंगे? और क्या वह हमसे कभी मिलेंगे भी? और क्या वह अगर इस पूरे ब्रह्माण्ड में केवल पृथ्वी ही एक मात्र ऐसा ग्रह हो। जिसपर ब्रह्माण्ड की सबसे अमूल्य चीज़ जीवन मौजूद है।

आज इस ब्रह्माण्ड के रहस्यों को समझने के लिए हमारे मन में सवाल तो बहुत हैं लकिन हमारे पास उसके जवाब न के बराबर हैं। हमारे मन में उठ रहे सवालों के जवाब हमे सिर्फ एक चीज़ से ही मिल सकता है। और वो है हमारी आधुनिक टेक्नोलॉजी। काश हम ऐसे ही विकसित होते रहे और कभी ग्रेट फ़िल्टर का शिकार न हो। और हम पहली, दूसरी और तीसरी प्रकार की सभ्यता बन कर पूरी आकाशगंगा में ही फैल जायें। और सभी अनसुलझे सवालों के जवाब ढूंढ पाएं।


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