मूर्ख दूधवाला

एक गांव में रामू दूध वाला रहा करता था। उसके साथ उसकी पत्नी सीता और एक बेटा श्याम रहते थे। रामू के पास दो गायें थी, जिनका दूध बेच कर वह अपने परिवार का गुजारा किया करता था।

रामू काफी ईमानदार और मेहनती था। एक दिन की बात है, रामू सुबह सुबह जल्दी उठ कर गाय का दूध निकलता। और उसे दूध की टंकी में भर कर साइकिल रख कर दूसरे गांव में बेचने के लिए निकल जाता। दूध ले लो, ताज़ा ताज़ा दूध ले लो, आवाज निकल कर वह दूध बेचा करता था। रामू की आवाज़ सुन कर घरो से काफी लोग निकल कर आते और रामू से दूध लिया करते।

मिठाई लेकर आये?

रामू का दूध काफी शुद्ध और बढ़िया होता था। इसी वजह से रोज उसका सारा का सारा दूध बिच जाया करता था। दूध को बेच कर सीधा वह अपने घर जाता। रामू के घर पहुंचते ही उसका बेटा श्याम उसकी ओर दौड़ता हुआ आया।

और बोला पिताजी, क्या आप मेरे लिए मिठाई लेकर आये? अपने कहा था कि कल जरूर लेकर आऊंगा। रामू बोलता है माफ़ करना बेटा समय नहीं मिला। श्याम, रामू से बोला क्या पिताजी आज भी आप मिठाई लेकर नहीं आये। जाओ मुझे आपसे कोई बात नहीं करनी है। रामू बोला में काम में इतना व्यस्त हो गया कि लाना ही भूल गया। कल पक्का याद से लेकर आऊंगा।

रामू की कमाई

रामू की कमाई दूध बेच कर भी पूरी नहीं पड़ती थी। वह इसके लिए मेहनत करता लेकिन वह दूध बेच कर भी उतने ही पैसे कमा पाता। जिससे उसके घर का सिर्फ गुजरा ही हो पाता था। यही सोच सोच कर वह परेशान भी रहा करता था। वह सोचता कि ज्यादा पैसे कमाने के लिए मुझे एक और गाय खरीदना होगा।

लेकिन उसके लिए पैसे कहाँ से लेकर आऊं। दूध बेचकर जो भी पैसे मिलते हैं उसमे घर का खर्च ही पूरा हो पाता है। बाकी तो कुछ बच ही नहीं पाता। में अपने बेटे श्याम को कभी उसके मन की चीज़ भी नहीं दिलवा पाता हूँ। मेरी बीवी सीता तो बेचारी अपना मन मार कर ही रह जाती है। पता नहीं भगवान को क्या मंजूर है।

रामू की परेशानी

तभी उसकी बीवी सीता उसके पास आती है। रामू को इस तरह से परेशान देख कर वह उससे पूछती है। श्याम के पिताजी क्या बात है? किस गहरी सोच में डूबे हुए हो? रामू बोलै तुको तो बता ही है श्याम की माँ। कि दूध बेच कर जो कुछ भी कमा कर लता हूँ। उससे सिर्फ घर का खर्च ही पूरा हो पाता है। अगर अपने पास एक और गाय होती। तो अपनी काफी कमाई हो जाती।

सीता बोली कोई बात नहीं, आप चिंता नहीं किया करो। हम थोड़ा थोड़ा पैसा जोड़ कर जल्द ही एक और गाय खरीद लेंगे। रामू बोलै जोड़ेंगे तो तब न, जब कुछ बचेगा। सीता बोली आप भी क्या बातें करते हैं। चलिए जाकर हाँथ पैर धो कर खाना खा लीजिये। उसके बात सीता, रामू और श्याम के लिए खाना लगा देती है। और सभी खाना खा कर सो जाते हैं।

आमदनी कैसे बढ़ाऊ?

अगले दिन रामू सुबह जल्दी उठ कर। अपनी दोनों गायों को नेहला धुला कर और उन्हें चारा खिला कर। उनका दूध निकाल कर बेचने के लिए दूसरे गांव चल देता है। गांव में उसके दूध की तारीफ हर कोई करता कि उसके दूध जैसा कोई नहीं देता। रामू अपने दूध में बिलकुल भी मिलावट नहीं किया करता।

और यही एक ऐसा कारण था कि गांव का हर व्यक्ति उससे दूध लेता और हांथो हाँथ पैसे भी देता। और इस तरह रोज उसका पूरा का पूरा दूध बिक जाया करता था।

वह उस दिन दूध बेच कर अपने घर लौट रहा था। और कहते हुए जा रहा था कि आखिर दूध से अपनी आमदनी कैसे बढ़ाऊ? जिससे में और ज्यादा पैसा कमा पाऊं। इतने पैसा भी मेरे पास नहीं हो पा रहे कि एक नयी गाय खरीद पाऊं। कुछ समझ न आ रहा है, कि क्या करूँ?

एक विचार

यह सब सोचते सोचते रामू अपने घर पहुंच जाता है। और घर पर पहुंचने के बाद थक कर वह खटिया पर बैठ जाता है। वही पर उसका बेटा श्याम पानी से खेल रहा था। उसके हाथ में सफ़ेद रंग था जो कि उससे छूट कर पानी में गिर जाता है। जिससे पानी का रंग बिलकुल सफ़ेद हो जाता है।

उसे देख कर रामू के दिमाग में एक विचार आता है। वह सोचता है कि पानी में सफ़ेद रंग गिरने से वह सफ़ेद हो सकता है। अगर दूध में थोड़ा पानी और थोड़ा सफ़ेद पाउडर मिलाने से दूध भी तो ज्यादा हो जायेगा। और इससे मेरी कमाई भी अधिक होगी। इससे किसी को शक भी नहीं होगा।

दूध में मिलावट

फिर क्या था, बिना कुछ देरी किये रामू बाजार से जाकर सफ़ेद पाउडर खरीद कर लाता है। और सुबह होने का इंतज़ार करता है। अगले दिन सुबह होते ही रामू जल्दी उठ कर। अपनी दोनों ही गायों की नेहला धुला कर उन्हें चारा खिला कर उनका दूध निकलता है।

फिर वह उसमे से थोड़ा सा दूध घर के लिए निकल लेता है। और बाकी दूध में पानी और पाउडर मिला देता है। जिसके बाद दूध दिखने में पहले की तरह एक दम गाढ़ा हो जाता है।

रामू की ख़ुशी

रामू कहता है अरे वाह यह तो पहले जैसा ही असली लग रहा है। देखने से तो बिलकुल भी नहीं लग रहा कि इसमें किसी प्रकार की मिलावट है। वह यह सब देख कर बहुत खुश होता है। तभी अचानक उसकी बीवी सीता वहां आ जाती है। और उसको यह सब करते हुए देख लेती है। सीता कहती है, श्याम के पिताजी आप यह सब कर जो कर रहे है, वह ठीक नहीं है। आप जितना भी कमाते हो हम उसी में ठीक है।

ज्यादा लालच ठीक नहीं है। रामू बोलै तुम चुप करो। में जो कुछ भी कर रहा हूँ, अपने परिवार के लिए कर रहा हूँ। ज्यादा कमाई होगी तो हम एक और गाय खरीद सकेंगे। कब तक हम ऐसी जिंदगी जीते रहेंगे। अब चलो जाओ यहाँ से और मुझे अपना काम करने दो।

अच्छी कमाई

उसके बाद रामू दूध बेचने गांव की तरफ चला जाता है। और वहां जाकर हमेशा की तरह आवाज लगाने लगता है। दूध ले लो, ताज़ा ताज़ा दूध ले लो, एक दम बढ़िया और शुद्ध दूध। तभी गांव की कुछ औरतें अपने घरों से निकलकर आती है। रामू से बोलती है, अरे रामू भैया आज मुझे कुछ ज्यादा दूध चाहिए। क्यूंकि आज मेरे बेटे का जन्मदिन है। तो मुझे आज उसके लिए मिठाई और खीर बनानी है।

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रामू बोला क्यों नहीं भाभीजी, अभी देता हूँ। इसी तरह उस दिन भी रामू का पूरा दूध बिच जाता है। और आज उसकी बाकि दिन से ज्यादा अच्छी कमाई होती है। और वह अपना पूरा दूध बेच कर हसी ख़ुशी घर चला जाता है। घर पर जा कर अपने पैसे गिनने लगता है और बहुत खुश होता है।

लालच

ज्यादा कमाई होने की वजह से रामू के मन में और भी लालच हो जाता है। फिर वह अपनी बीवी सीता को बुलाता है। और उसको आज की कमाई के बारे में बताता है। सीता बोली जिस तरह से आप पैसे कमाने में लगे है।

वह बिलकुल भी ठीक नहीं है। ज्यादा लालच करना बिलकुल भी ठीक नहीं है। रामू बोला आज के समय में सभी लोग ज्यादा कमाने के लिए कुछ न कुछ करते है। मेने किया तो क्या गलत किया।

रोज की कमाई जोड़ता

फिर अगले दिन रामू रोज की तरह अपने दूध में पानी और पाउडर मिलाने लगा। और फिर उसे गांव में बेचने चला गया। जब वह दूध बेच कर घर जाता तो रोज की कमाई जोड़ता। और कमाई ज्यादा होने के कारण बहुत खुश होता।

और सोचता है कि अगर इस तरह से कमाई होगी और जल्द ही में बहुत सारी गाय खरीद लूंगा। बहुत जल्दी अमीर भी बन जाऊंगा। इसी तरह रामू रोज अपने दूध में पानी और पाउडर मिलाकर दूध की मात्रा बढ़ा देता।

दूध की शिकायत

फिर अगले दिन रामू रोज की तरह अपने दूध में पानी और पाउडर मिलाने लगा। और फिर उसे गांव में बेचने चला गया। जब वह दूध बेच कर घर जाता तो रोज की कमाई जोड़ता। और कमाई ज्यादा होने के कारण बहुत खुश होता। और सोचता है कि अगर इस तरह से कमाई होगी और जल्द ही में बहुत सारी गाय खरीद लूंगा। बहुत जल्दी अमीर भी बन जाऊंगा।

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इसी तरह रामू रोज अपने दूध में पानी और पाउडर मिलाकर दूध की मात्रा बढ़ा देता। उसे बेचने गांव में गया। पर एक दिन जब वह दूध दे रहा था। तभी कुछ औरतें रामू से उसके दूध की शिकायत करती। वह बोली रामू भैया क्या बात है। अब आपके दूध में पहले जैसा स्वाद ही नहीं रहा और पीने पर भी कुछ अजीब सा लगता है।

बात को संभाल लेता है

रामू बोला अरे भाभी जी दूध तो पहले जैसा ही है। अब गाय जैसा दूध देगी, वैसा ही निकलेगा न। औरतें उस दिन रामू से दूध तो ले लेती है। साथ में यह भी कहती है, रामू भैया आप दूध में मिलावट तो नहीं करते हो? रामू बोला क्या भाभी जी आप भी कैसी बातें करती है। में और मिलावट, राम राम बिलकुल भी नहीं।

रामू उस दिन बात को संभाल लेता है और अपना पूरा दूध बेच कर घर पर चला जाता है। ज्यादा कमाई होने की वजह से रामू का लालच और भी बढ़ गया था। जो लोग रामू से दूध लेकर पीते थे, उसकी तबियत खराब होने लगी थी।

फैसला

कुछ आदमी आपस में बातें करते है, भैया मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही है। जो दूध रामू बेच रहा है, वही दूध उसका परिवार भी पीता है। पर उसके परिवार में तो सभी हष्ट पुष्ट है। और हम जब यह दूध पीते हैं लेकिन हम पीकर बीमार पड़ रहे है।

हमारी और हमारे बच्चो की तबियत खराब हो रही है। सभी मिलकर फैसला करते हैं कि इसके बारे में हम सबको पता लगाना होगा।

बच्चो की जांच

तबीयत खराब होने की वजह से सभी लोग पास के अस्पताल में जाते है। और डॉक्टर साहब से बोलते हैं, देखिये न हमारे बच्चो को क्या हुआ है? डॉक्टर सभी बच्चो की जांच करते हैं और बताते हैं। तुम्हारे बच्चो की तबियत मिलावटी दूध पीने की वजह से खराब हुई है। डॉक्टर के इस बात से गांव वालो को पूरा भरोसा हो जाता है। कि रामू ही हमें मिलावटी दूध देता है।

अगले ही दिन सभी गांव वाले रामू के घर जाकर देखते हैं। रामू अपने घर में छुपकर अपने दूध में पाउडर और पानी मिला रहा होता है। यह सब कुछ गांव के लोग देख लेते हैं। और वही पर उसको मरना शुरू कर देते हैं। तभी से रामू को अक्ल आ जाती है। और वह उस दिन से दूध में मिलावट करना बंद कर देता है।

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