संस्कारी बेटे की कहानी

सिताबपुर नाम के एक गांव में विमला अपने तीन बेटे राज, विक्रांत, प्रबल और अपनी एक छोटी बेटी आशा के साथ रहती थी। राज के पिताजी की किसी वजह से मृत्यु हो गयी थी। जो एक अच्छी कंपनी में मैनेजर थे। उन्होंने एक बड़ा सा घर भी ख़रीदा था। जसको लोन पर लिया था।

इसी कारण पति के देहांत के बाद विमला के बच्चो को लेकर एक बस्ती में रहने की नौबत आ गयी थी। विमला अपने चारो बच्चो को पढ़ाना चाहती थी। लेकिन घर के हालत इतने खराब थे कि वह ऐसा नहीं कर सकती थी। उसे अपनी आशाओं को मन ही मन दबाना पड़ रहा था।

ढाबे पर काम

राज अपनी पढ़ाई छोड़ कर उसी गांव में एक छोटे से ढाबे पर काम करने लगा। विमला के चारो बेटे में से छोटा बेटा प्रबल बहुत ही होशियार था। साथ ही चालाक और स्वार्थ बुद्धि का भी था। लेकिन उसने अपने दम पर स्कूल से छात्रवृत्ति कमाई थी। और उसी पर अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करने की ठान ली। वह शहर जाकर अपनी आगे की पढ़िए करने के बारे में सोचने लगा।

एक दिन प्रबल अपनी माँ से बोला पिताजी तो नहीं रहे लेकिन आप तो जानती हो। मुझे छात्रवृत्ति मिली है, जिससे में अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए शहर जाना चाहता हूँ। विमला बोली यह तो ठीक है बेटा लेकिन इसके अलावा भी तो कई खर्चे होते हैं ना। तभी बीच में राज आ जाता है और बोलता है माँ आप चिंता मत कीजिये। कोई बात नहीं पिताजी के बाद मेरे सारे भाइयों की जिम्मेदारी मेरी है। विमला अपने बड़े बेटे राज को बड़े प्यार से आशीष देती है।

ढाबे पर दिन रात मेहनत

अगले ही दिन प्रबल अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए शहर चला जाता है। गांव में राज अपने दूसरे भाई विक्रांत और बहन आशा को भी स्कूल में पढ़ाई देता है। और राज खुद एक ढाबे पर दिन रात मेहनत करता है।

तीन साल बीत जाने के बाद, प्रबल अपनी पढ़ाई पूरी करके घर लौटता है। और अपनी बड़े भाई राज से बोलता है, भैया मुझे बैंक मैनेजर की नौकरी मिल चुकी है। अब मुझे शहर में ही रहना होगा। कुछ समय बाद आप सभी को वही पर लेकर जाऊंगा। प्रबल की सभी बातें सुन करघर में सभी बहुत खुश होते हैं।

काम में व्यस्त

उसके बाद प्रबल वापस शहर चला जाता है और अपने काम में व्यस्त हो जाता है। कुछ समय बाद विक्रांत को भी शहर में अच्छी नौकरी मिल जाती है। घर में अब काफी अच्छा माहौल हो गया था। लेकिन फिर भी राज को अपने काम के लिए वक़्त पर ही जाना होता है।

क्यूंकि विक्रांत और प्रबल, दोनों में से कोई भी अपनी कमाई का एक रूपए भी घर नहीं भेजते थे। दिन इसी तरह बीत रहे थे। विमला की बेटी की आशा की उम्र अब शादी के लायाक हो चुकी है।

शादी की उम्र

फिर एक दिन विमला अपने बड़े बेटे राज से बोलती है। राज बेटा अब आशा की शादी की उम्र हो चूकी है। अगर समय पर ही कोई काम हो जाये तो अच्छा होता है। राज बोला बिलकुल सही कहा माँ आपने। राज ने अपनी माँ से हाँ तो बोल दिया था लेकिन उसको अंदर ही अंदर पैसो के बारे चिंता सताने लगी थी।

प्रबल और विक्रांत के लिए राज ने पहले ही अपने सेठ जी से रूपए उधार लिए हुए थे। राज मन ही मन सोचने लगा कि अब आशा की शादी का मतलब और खर्चा। कैसे होगा ये सब? क्या में यह सब अकेला कर भी पाउँगा? मेने सोचता था कि विक्रांत और प्रबल की नौकरी लगने के बाद सेठ जी के सारे पैसे लौटा दूंगा। लेकिन उन दोनों से पैसे मांगना मतलब सही नहीं होगा। चलो देखते हैं, मुझे अब पहले से और ज्यादा मेहनत करना होगा।

अखबार बेचना भी शुरू कर दिया 

उसके बाद राज काम करने के लिए घर से निकल जाता है। अब वह सुबह उठते ही अखबार बेचना भी शुरू कर देता है। उसने अपनी बहन आशा के लिए थोड़े थोड़े पैसे जमा करना भी शुरू कर दिया था।

एक दिन विमला अपने बेटे राज से बोली आशा को देखने के लिए लड़के वाले आने वाले हैं। आज तुम घर पर ही रुको। प्रबल और विक्रांत भी आते ही होंगे। राज अपनी माँ से हाँ बोल कर उस दिन घर पर ही रुक जाता है।

घर वाले आश्चर्यचकित

उस दिन विक्रांत अपनी पत्नी शीला को साथ लेकर घर पर आता है। उन दोनों को देख कर विमला और बाकी के घर वाले आश्चर्यचकित रह जाते हैं। किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। कि आखिर विक्रांत किसको लेकर आया है।

तभी विक्रांत अपनी माँ विमला से बोलता है, माँ यह अपनी बहु शीला है। में अपने काम में बहुत ज्यादा व्यस्त था। वैसे भी मेने सोचा क्यों न आप सभी को एक तौफा ही दिया जाये? विक्रांत की यह सभी बातें सुन कर विमला और राज को बहुत ज्यादा दुःख होता है। क्यूंकि विक्रांत ने उसकी शादी के बारे में घर पर किसी को नहीं बताया।

इकलौता बेटा

कुछ ही देर में आशा को देखने के लिए लड़के वाले आ जाते हैं। आशा को लड़का पसंद आ जाता है और लड़के को भी आशा पसंद आ जाती है। लड़के के पिताजी बोले विमलाजी रामू हमारा इकलौता बेटा है। इसलिए हम सभी घरवाले इसकी शादी बहुत ही धूम धाम से करवाना चाहते हैं। शादी में जो भी खर्चा होगा वो सब हम बाँट लेंगे।

रामू के पिताजी की बातें सुनकर विक्रांत और प्रबल को लगता है। कि शादी का सारा खर्चा अब उन दोनों को ही उठाना होगा। तभी प्रबल उनसे बोलने के लिए आगे आता है। तभी विक्रांत बोला, अरे भाईसाहब आप कौन से ज़माने में जी रहे हैं। आज कल तो लोग कोर्ट में जाकर ही शादी कर लेते हैं। ऐसे फिजूल का खर्च करने की क्या जरूरत है।

फिजूल के खर्च

यह सब सुनने के बाद रामू के पिताजी बोले, अरे ये क्या कह रहे हैं आप? विक्रांत बोला, बड़ी शादी का मतलब फजूल का खर्चा। और ऐसे फिजूल के खर्च करने वाले घर में हमे अपनी बहन की शादी नहीं करवानी। प्रबल भी विक्रांत की हाँ में हाँ मिलाता है।

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अपने दोनों बेटे विक्रांत और प्रबल की बातें सुन कर विमला बोलती है। तुम दोनों यह क्या बोल रहे हो? अरे उन्होंने कोई दहेज़ नहीं माँगा। हमारी भी तो एक ही बेटी है, तो फिर बड़ी शादी में समस्या ही क्या है? सबकी बातें सुनने के बाद रामू और उसका परिवार वहां से जाने लगता है।

लेकिन जाने से पहले रामू के पिताजी बोलते हैं, विमला जी हम चलते हैं आप लोग सोच विचार करके हमें दीजियेगा। उनके घर से जाने के बाद विक्रांत अपनी पत्नी और प्रबल के साथ वापस शहर चला जाता है।

बर्बाद नहीं कर सकते

शहर जाते वक़्त विक्रांत अपनी माँ से बोलता है। में इस शादी के लिए एक रूपए भी नहीं दे सकता हूँ। साथ में प्रबल भी बोलता है, में भी नहीं दूंगा। कितनी मेहनत से हम कमाते है और ऐसे फिजूल की खर्च में हम उसको ऐसे बर्बाद नहीं कर सकते हैं। इसके बाद विमला, राज और आशा को इनकी बातों से बहुत ज्यादा दुःख होता है।

आशा रोने लगती है और विमला से बोलती है, माँ क्या मेरी शादी कभी नहीं होगी? मुझे रामू से ही शादी करना है। राज उसकी बातें सुनकर उसे गले लगा लेता है। और आशा से बोलता है आशा क्या तुमको मुझ पर विश्वास नहीं है? तुम्हारा ये भाई तुम्हारी शादी बड़ी धूम धाम से करेगा। देख लेना सभी देखते ही रह जायेगे।

उस रात नींद नहीं आती

राज को उस रात नींद नहीं आती और दूसरे ही दिन रामू के पिताजी को फ़ोन करके कहता है। हमारी तरफ से शादी के लिए हाँ है। और हम वैसे ही धूम धाम से शादी करेंगे जैसा आप चाहते हैं। उसके बाद राज अपनी बहन की शादी बड़े ही धूमधाम से करवाता है। आशा की शादी में विक्रांत और प्रबल नहीं आते हैं।

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आशा की शादी होने के बाद भी राज को काम पर जाना होता है। फिर राज का मालिक राज से बोला कि राज तुम्हे हमारे यहाँ काम करते करते करीब 8 साल हो चुके हैं। अब कब तक तुम अपने घर की पूरी जिम्मेदारी अकेले ही उठाओगे।

जिम्मेदारियों से मुक्त

राज बोला सेठजी अब तो में सभी जिम्मेदारियों से मुक्त हुआ हूँ। बस आप से लिया हुआ कर्ज चूका दूँ सारी समस्या खत्म हो जाएगी। सेठजी बोले राज तुम मेरे यहाँ 8 साल से काम कर रहे हो। और तुम्हारे हाँथ का खाना यहाँ के लोगो को बहुत ही पसंद आता है।

यह देखो यहाँ पर खाना बनाने वालो की प्रतियोगिता होने वाली है। जिसमे मेने तुम्हारा नाम दे दिया है। और इसके लिए तुमको कल ही निकलना होगा। राज बोलता है कैसे जाऊंगा, मेरे पास तो एक रूपए भी नहीं है। कैसे जाऊंगा में वहां पर। सेठजी बोले राज मुझे कुछ नहीं सुन्ना है। तुमको वहां पर जाना ही होगा। तुम्हारा जो भी खर्चा होगा वो सब में सम्हाल लूंगा। यह समझ लो यह तुम्हारी बक्शीश है तुम्हारी ईमानदारी का।

प्रतियोगिता जीत जाता है

फिर आज वहां जाता है और प्रतियोगिता जीत जाता है। अब राज के पास बहुत सारे पैसे बह आ चुके होते हैं। वह सेठजी को बहुत धन्यवाद् करता है। और वह अब एक बड़ा सा होटल भो खोल लेता है। साथ में अपना एक नया घर भी खरीद लेता है। उसकी माँ विमला उसकी शादी भी करवा देती है।

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जिसके बाद वह अपनी माँ और अपनी पत्नी के साथ सुखी जीवन बिताने लगता है। अपनी बहन की सभी ख्वाहिशे भी पूरी करता है। दूसरी तरफ विक्रांत एक बैंक में मैनेजर था। वह अपनी पत्नी की जरूरत की चीजे पूरी करने के लिए गैरकानूनी काम करता था। यह बात बैंक वालो को भी पता लग ही गयी थी। जिस वजह से विक्रांत को पुलिस पकड़ कर ले जाती है।

सभी हसी ख़ुशी रहने लगते हैं

यह बात सुनते ही विक्रांत की पत्नी राज के पास आती है। और उसको सभी बातें बता देती है। विमला अपने बेटे राज को रोकने की कोशिश करती है। लेकिन राज अपने भाई विक्रांत को पुलिस स्टेशन से छुड़वा लेता है। अपने बड़े भाई का इस प्रकार का व्यवहार देख कर विक्रांत को भी सब समझ आ जाता है।

दूसरी तरफ प्रबल को भी अकेला रहना सही नहीं लगता था। जिसकी वजह से वह भी राज के पास चला जाता है।अब राज, विक्रांत और प्रबाल एक साथ अपनी माँ विमला के साथ हसी ख़ुशी रहने लगते हैं।

इस कहानी से सीख

हमेशा हमें हमारे खराब समय में अपने भाई बहन ही काम आते हैं। लालच मे आकर गलत रस्ते से कमाए गए पैसे किसी काम नहीं आते हैं। आज नहीं तो कल वह पकडे ही जाते है। इसलिए हमें हमेशा अपने बड़ो का आदर करना चाहिए।

क्यूंकि खराब हालातों में उन्होंने हमें कैसे बड़ा किया है। ये तो सिर्फ वही जानते है। जिन लोगो ने हमेशा हमें सही रास्ता दिखाया और अच्छी परवरिश की, शिक्षा दी। खुद पीछे रह कर हमें आगे बढ़ाया, ऐसे लोगो का हमेशा सम्मान करो।

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