सौरमंडल से एक ग्रह गायब हो जाये तो क्या होगा?

सौरमंडल से एक ग्रह गायब हो जाये तो क्या होगा?

मैं, आप और हम सभी कई परिवार होता है। परिवार में बहुत सारे लोग रहते हैं और इन लोगो के बीच एक अटूट रिश्ता होता है। परिवार के सारे लोग एक दूसरे की मदद करने के लिए हमेशा तैयार होते है। और एक दूसरे के सुख और दुःख में हमेशा साथ रहते हैं। जब हमारे परिवार का कोई सदस्य हमे छोड़ कर चला जाता है, तो हमे बहुत ज्यादा बुरा लगता है। और उसकी कमी हमे हमेशा महसूस होती रहती है। हमारा सौरमंडल भी एक परिवार की तरह ही है, जहाँ सूरज और उसका ऑर्बिट करने वाले आठों ग्रह है।

वैसे क्या कभी आपने यह सोचा है कि क्या होगा अगर सौरमंडल से अचानक से एक ग्रह गायब हो जाये तो? इसका हमारी धरती और जीवन शैली पर क्या असर पड़ेगा? और ऐसा कौन सा ग्रह है जिसको हम सबसे ज्यादा मिस करने वाले है? आज के इस आर्टिकल में आपको बताएंगे कि सौरमंडल से एक ग्रह गायब हो जाये तो क्या होगा?

बुध ग्रह 

सबसे पहले बात करते हैं सूरज के सबसे करीब स्तिथ, सौरमंडल के सबसे छोटे ग्रह बुध की। यह ग्रह बहुत ही ज्यादा छोटा है और इससे बड़ा तो बृहस्पति ग्रह का चाँद गेनीमेड है। मंगल ग्रह का द्रव्यमान कुछ ज्यादा नहीं है और न ही यह अपने आस पास के खास वस्तुओं पर गुरुत्वाकर्षण प्रभाव डालता है। इस तरह अगर कल के दिन बुध ग्रह अचानक से गायब हो जाये। तो सौरमंडल में सिर्फ सात ग्रह ही बचेंगे। इसके सौरमंडल में न होने से कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला।

शुक्र ग्रह

अब बात करते हैं, शुक्र ग्रह की। जो की सौरमंडल का तीसरा, सबसे छोटा और सबसे गरम ग्रह है। हम इस ग्रह पर जीवन की खोज करते हुए काफी समय बिता चुके हैं। लेकिन इस पर जीवन का होना नहीं है। हालाँकि, हाल ही में यहाँ पर फोसफीन गैस की खोज हुई थी। जो कि शुक्र ग्रह पर सूक्ष्म वन्यजीव होने का सबूत बताया जा रहा है। लेकिन हम इंसानो के लिए यहाँ पर कुछ भी नहीं है।

चाँद के बाद शुक्र ग्रह धरती के आसमान में चमकने वाला सबसे तेज़ है। इसको पृथ्वी का जुड़वाँ ग्रह भी कहा जाता है। इन कुछ बातों के अलावा यह ग्रह सौरमंडल में कुछ खास महत्व नहीं रखता है। शुक्र ग्रह के न होने पर धरती के ऑर्बिट थोड़ी बहुत बदल सकती है। वो भी हमे हजारो सालों के बाद ही महसूस होगा। यानिकि इस ग्रह की कमी हमारे सौरमंडल में कुछ खासा प्रभाव नहीं डालेगी।

धरती

शुक्र ग्रह के बाद आती है हमारी धरती। अगर धरती नहीं होगी, तो इस सौरमंडल में कुछ रहे या नहीं रहे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। क्यूंकि जिसे फर्क पड़ना है, वही नहीं रहेगा।

मंगल ग्रह

धरती के बाद आता है मंगल ग्रह। अगर में मंगल ग्रह को गायब कर दूँ, तो सबसे ज्यादा फर्क पड़ने वाला है एलोन मस्क को। उसका तो जैसे जीवन का मकसद ही खत्म हो जाने वाला है। मंगल वह ग्रह है, जिसे फ़िलहाल के टेक्नोलॉजी से हम अपने फ्यूचर होम की तरह देखते हैं।

यह बुध ग्रह के बाद सौरमंडल का दूसरा सबसे छोटा ग्रह है। और यह धरती का पडोसी ग्रह भी है। वैसे आगर में कहूं कि मंगल ग्रह के गायब होने से हमे नुक्सान नहीं बल्कि उसका फायदा होगा। फिर क्या आप मेरी बातों पर विश्वास करोगे? अगर नहीं तो इसके पीछे का कारण पढ़िए। मंगल ग्रह और बृहस्पति ग्रह के बीच में क्षुद्रग्रह बेल्ट मौजूद है। मगल ग्रह के न होने पर यह क्षुद्रग्रह बेल्ट धरती और बृहस्पति ग्रह के बीच में होगी।

अब आप यह सोच रहे होंगे कि ऐसे में तो बहुत सारे क्षुद्रग्रह हमारी धरती पर गिरने लगेंगे। और क्षुद्रग्रहों के गिरने से कितनी तबाही होती है, यह हमे आज से साढ़े छह करोड़ साल पहले देखने को मिला था। उस समय जब एक क्षुद्रग्रह धरती पर गिरा था, जिससे डायनासोर की पूरी प्रजाति मिट गयी थी।

मंगल ग्रह के न होने पर सूरज इन क्षुद्रग्रह को अपनी और ज्यादा खीचता है। लेकिन यह धरती की ओर नहीं आएंगे। क्षुद्रग्रह बेल्ट से कोई क्षुद्रग्रह धरती की तरफ तब आता है, जब वह मंगल ग्रह की गुरुत्वकर्षण में फस कर स्लिंग शॉट लेने हुए हमारी धरती की ओर आ जाता है। तो मंगल ग्रह के न होने पर ऐसा नहीं होगा।

बृहस्पति ग्रह

अब आगे बढ़ते हैं और बात करते हैं सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति के बारे में। यह ग्रह धरती से 90 करोड़ किलोमीटर से भी ज्यादा दूर है। लेकिन इसका प्रभाव हमारी धरती पर ऐसा है कि अगर यह नहीं होता। तो शायद आज धरती पर कोई भी जीवन नहीं होता। धरती पर जीवन और पानी, दोनों के पीछे भूतपूर्व में आये क्षुद्रग्रह का ही हाँथ माना जाता है। और बृहस्पति ग्रह ने ही इनको धरती की तरफ भेजा होगा।

हालाँकि बृहस्पति ग्रह ज्यादातर क्षुद्रग्रह को अपनी गुरुत्वाकर्षण प्रभाव में रखता है। और वाह़य अंतरिक्ष से आने वाली क्षुद्रग्रह को धरती के पास नहीं आने देता। यही कारण है कि धरती पर क्षुद्रग्रह के प्रभाव जैसी घटना करोड़ो सालों में एक बार ही होती है। नहीं तो यह हर दूसरे दिन की कहानी होती। और हम इंसान यहाँ पर नहीं होते। बृहस्पति का द्रव्यमान सौरमंडल के बाकी सारे ग्रहों के द्रव्यमान को मिला देने के बाद भी 2.5 गुना ज्यादा ही होगा। अगर बृहस्पति ग्रह अचानक से गायब हो जाता है, तो सौरमंडल के सारे ग्रहों के ऑर्बिट अशांत हो जायेंगे। और बहरी अंतरिक्ष से बहुत सारी चीज़ें, धरती और सौरमंडल के अन्य ग्रहों से टकरा सकते हैं।

शनि ग्रह

अब बात करते हैं हमारे सौरमंडल के शनि ग्रह के बारे में। सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह। तो क्या इसके गायब होने के बाद हमारी जिंदगी में कोई शनि आने वाला है। तो ऐसा बिलकुल नहीं है। शनि ग्रह तो बृहस्पति ग्रह से भी बहुत ज्यादा दूरी पर है। वह अपने आस पास के ऑर्बिट को प्रभवित कर सकता है। लेकिन धरती पर इसका कोई भी असर नहीं पड़ेगा। बस हम इसकी खूबसूरत रिंग्स को जरूर याद करेंगे। और हाँ, एक चीज़ और फ़िलहाल में हम इंसानो को शनि और बृहस्पति ग्रह के कई चाँद और जीवन के कई सुराग भी मिलते हैं। इससे यह चाँद हमारे आने वाले समय के लिए संभावित उम्मीदवार बन सकते है। लेकिन अगर यह ग्रह ही नहीं होंगे, तो शायद इनके चाँद आपस में टकरा कर एक दूसरे को बर्बाद कर देंगे।

अरुण ग्रह

अगला नंबर आता है, अरुण ग्रह का। यह सौरमंडल का तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है। और अपनी असामान्य स्पिन के लिए जाना जाता है। अरुण ग्रह के न होने पर भी दूसरे ग्रहों की ऑर्बिट में थोड़ा बहुत ही अंतर् आएगा। और वो भी कई हजारो साल में हमें दिखाई देगा। इसके अलावा इस ग्रह के सौरमंडल में होने या न होने से दूसरे ग्रहों पर कोई भी प्रभाव नहीं होगा।

अब आप सोच रहे होंगे कि जब हमें अरुण ग्रह से कोई असर नहीं होगा तो फिर वरुण ग्रह से क्या ही होगा। अरुण ग्रह के अपने सौरमंडल में न होने से हम धरती वासियों को शायद कोई भी फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन सौरमंडल में इससे उथल पुथल मच जाएगी। क्यूंकि वरुण ग्रह के बाद आता है, प्लूटो। और उसके बाद शुरू होता है क्विपर बेल्ट।

वरुण ग्रह

प्लूटो की आकार काफी छोटी है और वरुण ग्रह के न होने पर उसके ऑर्बिट में बड़ा अंतर् देखने को मिल सकता है। वही वरुण ग्रह क्विपर बेल्ट के चीज़ों पर भी अपना गुरुत्वाकर्षण प्रभाव बना कर रखता है। अगर वरुण ग्रह नहीं होगा, तो क्विपर बेल्ट में बहुत सारे बदलाव आएंगे। इससे कुछ चीज़ें अचानक से सौरमंडल के अंदर की ओर आने लगेंगे। तो कुछ सूरज से कुछ दूर चले जाएंगे।

वरुण ग्रह के न होने पर इनके ओर्बिट्स में काफी बदलाव आएंगे। और इसके एरिया में कई सारे टकराओ देखने को मिलेंगे। और अंतरिक्ष में टकराओ का केवल एक ही मतलब होता है और वो है तबाही। इन टकराओ के कारण बहुत सारे उपग्रह और दूसरी चीज़ें सौरमंडल के अंदर चले जायेंगे। और क्या पता उनमे से धरती से टकराकर हमे हमेशा के लिए खत्म कर दे। जैसा कि में हमेशा ही कहता हूँ, यह ब्रह्माण्ड है, इसमें कुछ भी हो सकता है।

वैसे किसी ग्रह का अचानक से गायब हो जाना, केवल कल्पना ही हो सकता है। यह असल जिंदगी में संभव नहीं है। वैसे आप इन सभी के बारे में क्या सोचते हैं? क्या सौरमंडल में से किसी ग्रह के गायब हो जाने पर हमे कोई फर्क पड़ेगा? अगर में आपसे पूछू कि वह कौन सा ग्रह है, जिसके गायब हो जाने से उसको आप बिलकुल भी मिस नहीं करोगे। तो आपका जवाब क्या होगा? हमे नीचे कमेंट करके जरूर बताना।


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